Monday, 25 January 2010

जेकब के बचपन की स्मृती

मेरे बचपन की स्मृती
मैं बहुत स्कूल गया. ज़रुरी है कि आधिक स्कूल था. जब मुझे तीन साल था, मैंने प्रीस्कूल शुरू किया. शुरू में, मैं अंग्रेज़ी का वर्णमाला पढ़ा. एक साल के बाद, मैं आसान किताबें पढ़ सकता था. जब मुझे चार साल था, मैंने नंबर पढ़ा, अंग्रेज़ी और सपैनिश में. मेरा मनपसंद चीज़ प्रीस्कूल में नैप्टाइम था. मेरी मनपसंद सहली का नाम एजा था. एक बार, वह मेरे घर में थी, और मैंने उसके बाल प्लैस्टिक कैंची के साथ कटाये. इस के बाद, मैं बहुत परेशानी में था.
जब मैं प्रीस्कूल खत्म हुआ, मैंने एलेमेन्टरी स्कूल शुरू किया. इस स्कूल में, मैंने कुछ नई चीज़ें पढ़ी और मेरे पास कुछ नये दोस्त थे. किंडर्गार्डन में हमने कोई नहीं पढ़ी. हमनें खाना और प्लेयडो पकाये और अध्यापक ने हम को कहानियाँ पढाई. पहला ग्रेड मे, पढ़ाई शुरू किया. हमने वर्तनी, गणित, विज्ञान, और मिशिगन की इतिहास पढ़े. तब भी हमने खाना पकाया, लेखिन कम.
एलेमेन्टरी स्कूल में, मेरे दोस्त अक्सर बदल गये। मेरा पहला दोस्त का नाम, केनी था। मैंने उसको किताब पढ़ना सीखा, क्योंकि उस पर कठिन था। हम बहुत विडियोगेम्ज़ खेले भी। उस के बाद, मेरा दोस्त का नाम बाबी था. बाबी और मैं नें बहुत मज़ाक चीज़ें करे. मेरा बचपन नहीं रोचक था.
जकब बोल्टन

मेरी बचपन की स्मृतियाँ

जब मै छोटी थी, सोचती हूँ कि मै बहुत ख़ुशी हुई हर रोज़ क्योंकि मेरे माता-पिता कहते हें कि मै नहीं रोई थी और सब लोग मुझे पसंद था। मेरी पसंदीदा स्मृतिया है जब मेरी दादी ने मुझसे एक नया कैबज पैच डाल दी। भी याद कि मेरे नाना नानी ने एक नया लिटल मरमेद तंत दिया मुझसे। यह गिफ्ट बहुत पसंद थी! मै और मेरी सहेलियाँ तंत में सोती थी वीकेंड्स पे। भी याद कि मेरे माता पिता आईस क्रीम खाने के लिए बास्किन राबिन्ज़ या देरी क्वीन गए हर हफ्ता। मै और माता ने चौकलत मूस खाया था, मेरे पिता ने हीथ खाया था, और मेरा छोटा भाई ने दैकिरी आईस खाया था। वह दूध नहीं खा सकता था और इसलिए आईस करीम नहीं खा सकता था। लेकिन यह प्राब्लम अपना बचपन में ही था; आज वह दूध खा सकता है।

मेरे बचपन कि स्मृतियाँ

मुझे मेरे बचपन में छोटा था और चश्मा पहना था । मैं देत्रोइट, मिचिगन में पैदा हुए, लेकिन मेरे माता-पिता एक साल के बाद, केंटन को गये । मैं केंटन में रहता था जब तक मैं दस साल का था । मेरी बहन पांच साल मुझे से छोटी है, लेकिन मेरा बचपन में अपनी छोटी बहन भारत में रहती थी क्योकिं उसकी अम्रीका में बीमार थी और भारत में अच्छी लगती थी . मुझे केंटन में बहुत कुश था, क्योंकि मेरे दोस्तो केंटन में थे, और मुझे अपना स्कूल उच्छा लगता था . जब में आठ साल का था, मैं भारत को गया, और वहा दस महीने रहा . मेरी माता-पिता ने उसके कृषि पर काम किया, और मैंने कुछ नहीं किया . मैंने खाली कृषि में गाय के साथ खेला और पच्चम में दुसरे बच्चे के साथ खेला . जब हम अम्रीका वापस चला, मैंने स्कूल में एक ग्रेड कूद किया, और में नौ साल का था . एक साल के बाद हम (मैं, मेरे पिता, और मेरी माता) होर्षम, पेन्न्स्यल्वानिया को गया, और अभी मैं यहाँ रहता हूँ . मैं होर्षम में स्कूल को गया, और मैं मिडल स्कूल में थोडा फुटबोल (या अम्रीका में "साकार") खेला . मैंने मिडल स्कूल में "कराती" भी सबक लिया . मुझे बचपन में हर गुर्मी में मिचिगन को गया, और मेरे चाचेरे (जय और विजय) के साथ रहता था . जब मैं ग्यारह साल का था, मेरी छोटी बहन, कृष्ण, अम्रीका को आई, और अभी वहा रहती है . अब वह अम्रीका में एक स्वस्थ है, और इसलिए मैं कुश हूँ . मिडल स्कूल सिर्फ तीन साल था, और इसके बाद मैं हाई स्कूल को गया, और बहुत उच्छा पड़ा . क्योकिं मैं उच्छा पड़ा, मैं एक उच्छा विश्वविद्यालय को गया. यह विश्वविद्यालय "उनिवेर्सित्य ऑफ़ मिचिगन" है, और मुझे इस विश्वविद्यालय में बहुत कुश हूँ .

Sunday, 24 January 2010

मेरे बचपन की स्मृतिया

मेरा बचपन बहुत ही मजेदार था. मेरा माँ मुझे हमेशा बचपन की कहानियां सुनाती थीं. वह कहतीं थीं की जब मैं छोटी थी, मुझे चीज़ें इकट्टे करने का बहुत शौक था. जब हम नाना-नानी के यहाँ जाते थे, मैं पूरा घर घूमती थी और जब भी मुझे कोई चीज़ पसंद आती, मैं उससे उठाकर एक थैली मैं दाल देती. मैं, एक पांच साल की बच्ची, एक भरा हुआ थैला अपने कंधे पर रखकर पूरा घर घूमती. मैं अपनी नानी से कहती, "क्या मैं यह रख लूं?" और फटाफट अपने थैली मैं दाल देती. मेरी नानी खूब हस्तीं!
बचपन में मुझे अपने दोस्तों के साथ खेलना बहुत अच्छा लगता था. मेरा बचपन कुवैत में गुज़रा और उस जगह से मेरी काफी यादें जुडी हुई हैं. मैं रोज़ अपने घर के नीचे खेलने जाया करती थी. मैं और मेरे दोस्त क्य्क्लिंग करते थे और छुपा छुपी खेलते थे. बहुत मज़ा आता था. मैं पूरी शाम अपने दोस्तों के साथ बिताती और जब तक घर पहुँचती, मैं खूब थक्जती. फिर माँ मेरे पीछे लग जाती ताकि मैं अपना होमवर्क ख़तम कर सकूं. .
मुझे गुड़ियों के साथ खेलने का बहुत शौक था. मेरे कमरे में बहुत सारे बर्बियाँ थीं. मुझे उनको तय्यार करने में बहुत मज़ा आता था. जब भी मैं माँ के साथ बाज़ार जाती, तो मैं जिद करती की वे मेरे लिए एक गुडिया खरीदें. मेरे पास एक गुड़ियों का घर भी था.
बचपन में मेरी एक बहुत ही अच्छी दोस्त थी. उसका नाम श्रुती था. वह मुझे तब से जानती है जब से मैं छे महीने की थी. अब भी वह मेरी सबसी अच्छी दोस्त है. हम दोनों साथ में बड़े हुए हैं और मेरी सबसे सुन्दर यादें उससे जुडी हुईं हैं. हम साथ साथ स्कूल में पड़े हैं और हमने बहुत मस्ती की है.

मेरे बचपन की स्मृतियाँ

मैंने अपने परिवार के सात बहुत वक्ता गुज़ारा। बचपन में हम सुब बहुत खेलते थे। में भारेण में रहता था। वह बहुत सांड थी और बहुत गर्मी भी थी। मुझे खिलोने से खेलना बहुत पसुन्द था। मुझे बोल के सात खेलना बहुत पसुन्द था। में और मेरे दोस्त रोज़ बाहर बिसिकल चलते थे। हर दो या तीन साल में भारत जाता था और मेरे दुसरे परिवार से मिलता था। मुझे रोज भारतीय खाना मिलता था और में दभेली, पाव भाजी, और गन्ने का रूस पीता और खता था। में और मेरे चचेरे भाइयो और भेहेनो बाहर बहुत खेलते थे। वह मुझे बास्केटबाल खिलते थे। ओसकी वझे से मुझे बास्केटबाल अच्छे से खेलना आता है। हम बहुत सरे बच्चे के सात खेलथे थे। एके पंजाबी लड़का बहुत अच्छे से खेलता था। उसने मुझे बहुत खेलने के बारे में सिखाया। हम दोनों दोस्त बुन जाये।
में भारेण में इंग्लिश मीडियम स्कूल में पडता था। मेरे पास पाच अच्छे दोस्त थे। हम रोज क्रिकेट खेते थे। मुझे बातिंग बहुत पसुन्द थी और मेरे दोस्त को बोवलिंग पसुन्द थी। हम सुब बहुत नहीं लडते थे। में और मेरे भाई थोडा बहुत लडते थे। लकिन अब हम नहीं लडते है। जब में बार साल का था हम सुब फ्लोरिडा गए। मेंने मिकी और मीन्ने और दफ्फ्य को देखा। वह मेरा पहेली बार था डिस्नी में। में जी भर के खेला और मस्ती मरी। मुझे घर वापिस नहीं जाना था। मुझे रोज़ राएड्स में जाना था और शोस देकने थे। लकिन एके हफ्ते बाद मुझे वापिस मिचिगन जाना पढ़ा और स्कूल चालू हुई।
मेरी जनम मुंबई में हुई. जब में दो साल की थी में और मेरे माथा - पीता पुणे शिफ्ट हो गए. वहां मेरी बहेन का जनम हुआ. जब मैं तीन साल की थी मैं स्कूल जाने लगी वहां मैं मेरी सबसी अच्छी दोस्त निशि से मिली. जब मैं पांच साल की थी मेने सैंट जोसेफ्स हाई स्कूल में किन्देर्गारतें शुरू किया. मैं साथ साल पर कठिन किताबों को पड़ने लगी. जब मैं आठ साल की थी मेने मराठी बोलने और लिखने लगी. भारत में मैथ और स्सिएंस पर बहुत ही फोचुस था. मेरे पास बहुत पदोसीं थे और हम सब बहुत मस्ती करते थे. जब मैं दस थी मेरा परिवार अमेरिका चले आये. हम फर्मिन्ग्तों हिल्स को आये और एक अपार्टमेन्ट में रहेथे थे. वहां मैं आपने नयें पड़ोसिन के साथ दोस्त हुई और हम काप्तुरे थे फ्लग खेलते थे. मैं इधर स्कूल जाने लगी और धीरे से दोस्त बनाए. जब मैं बारा साल की थी हम एक बड़ा सा घर में शिफ्ट हुए और मेरे पड़ोसिन और अच्छे दोस्त मेक्सिको को गए क्योंकि उनके पिता का जॉब ट्रान्सफर हुआ.  फिर मैं हाई स्कूल को शुरू किया और हाई स्कूल में दबाते क़ुइज़्बोव्ल और टेनिस किया और बहुत ही कठिन क्लास लिए. मेने बहुत मेहेनाथ किया हाई स्कूल में और फिर में उनिवेर्सित्य ऑफ़ मिचिगन को एक्सेप्ट हुई और इधर आने का फ़ैसला किया. 

बचबन की स्मृतियाँ

एक मनपसंद बचबन की स्मृतियाँ जब मेरा परिवार अवकाश पर गया। जब मैं छोटा था, हम बहुत जगह गया। एक स्मृति बहुत याद आता हूँ। मैं दिस्नेय्वोर्ल्ड बहुत पसंद था और पसंद है। वहां बहुत लोग जाते है क्योंकिमशहूर जगह है। हम एक हवाई जगह में फ्लोरिडा जाना के लिए गया। मुझे विमान बहुत पसंद है क्योंकि वे दिलचस्प मशीन है। मुझे विमान इनता पसंद है की मैं एक जहाजरान बनना चाहता था। खैर, हम दिस्नेय्वोर्ल्ड पहुंचा। मैं कभी नहीं भूलूंगा मेरी प्रतिक्रिया जब मैं ने दिस्नेय्वोर्ल्ड का मनोरंजन पार्क घुसे। मैं बहुत विस्मित क्योंकि दिस्नेय्वोर्ल्ड बहुत बड़ा है और एक जादू जगह है। मैं ने सारे फिल्मे के अंक देखे। मेरा मनपसंद अंक "मिक्की मौसे" था क्योंकि वह कठिन चूहा है। मैं बहुत रोल्लेर्कोअस्तेर्स पर गया और बहुत मजा आया।

एक दूसरा स्मृति है जब मैं पहले समय भारत गया। जब मैं भारत पहुंचा, मुझे एक नया
ग्रह में लगता था। मैं बहुत भौचक्का जब मैं ने कुछ बड़े शहर देखे। मैं ने इतना लोग कभी नहीं देखा था. उसके बाद हम जी.टी सड़क से होकर पंजाब गया। जी.टी रोड बहुत आनंद है क्योंकि हमारा ड्राईवर बहुत तेज गाड़ी चलाया और हम कुछ ढाबे गया। ढाबे का खाना बहुत स्वाद है। मैं अपनी नानी का गॉव गया। यह गॉव बहुत अच्छा था और मैं अपने काफी परिवार मिला। एक चचेरा भाई के साथ स्कूटर पर बाज़ार घोमा और बहुत मजा आया। एक होर याद है कि हम बहुत ख़ूबसूरत मंदिर। वहां बहुत मंदिर है और अच्छा है। मुझे भारत बहुत पसंद है और तब तक मैं भारत अधिक जाता हूँ।

मेरे बचपन की स्मृतियाँ

मेरे बचपन में मुझे कभी-कभी चोट लगी एक बार मैं और मेरे दोस्त एक छोटे जंगल में थे। हम लोग साइकिलों पर दौड़ रहे थे और मैं पाताल पर गिरा। मेरी टांग में छोटी ही चोट लगी, लेकिन मैंने मेरी टांग देखकर बहुत खून देखा। मैं और एक दोस्त मेरा घर गए और मैं और मेरे माता-पिटा अस्पताल गाड़ी चलाएमुझे मेरी टांग में कुछ स्टिचज मिलने थे। मैं मेरे माता-पिता को रोया कि मुझे स्टिचज मिलना नहीं पसंद था। लेकिन अब मुझे मालूम है कि स्टिचज अनुकूल थे अब मेरे दायेंवाले टांग पर मेरा निशान हैआज मैंने अंग्रेज़ी की क्लास के लिए इस बचपन की स्मृति के बारे में एक कविता लिखी
मेरे यंग जीवान में मुझे मेरे दोस्त के साथ साइकिलों पर शहर घूमना अच्छा लगता था
हम लोग को शहर में स्केटबोर्ड करना भी अच्छा लगता थामैं स्केटबोर्ड करने में अच्छा कभी नहीं था, लेकिन वह मज़ेदार था। कुछ दोस्त अच्छे थे, और वे बहूत दिलचस्प ट्रिक्स कर सकते थेकुछ दिनों हम साथ-साथ सूरज के अस्त को सूरज के उदय से थेअनदर हम बहुत विडीओ-खेल खेले और बहुत फ़िल्में देखे। बाहर हम अक्सर स्पोर्ट्स खेले: ड्राइव-वे में बास्केटबॉल, यार्ड में बेसबॉल, और सड़क में फुटबॉल। हम्हें फुटबॉल खेलकर गारी के लिए चलना था। बचपन में मैं एक लीग में बास्केटबॉल खेला, और मिडल-स्कूल में मैं मेरे स्कूल के टीम के लिए बास्केटबॉल और फुटबॉल खेला

मेरे बचपन की स्मृतियाँ

मेरा बचपन तो बहुत अच्छा था। जब मै चार साल का था, हमारे घर मे चोरी हुई थी। चोरी के बाद मेरे माता-पिता ने यह फैसला किया के हम कैंटन मे रहेने जा रहे है। वहा मेरे फूफा, फूफी, और मेरे माता-पिता के कुछ दोस्त रहेते थे।

एक साल के बाद मै स्कूल जाने लगा। पहले मुझे स्कूल अच्छी नहीं लगी क्योकि मुझ को अंग्रेजी बोलना नहीं आता था। जब मै अंग्रेजी सीख गया तब मै दोस्तों बनाने लगा और स्कूल को बहुत पसंद करने लगा। स्कूल मे मै फुटबाँल का खेल और गणित की पढाय पसंद करता था।

मेरे माता-पिता जब अपने दोस्तों के घर जाते थे, मुझ को और मेरे भाई को साथ ले जाते थे। वहा हम सब बच्चो मिल कर बहुत मजा करते थे। कभी कभी हम खिलौने के साथ खेलते थे या विडियो गेम खेलते थे तो कभी कभी हम बहार कोई रमत खेलते थे।

मै, मेरा भाई, और दोस्तों, शमिक, चिराग, नीरज, और भार्गव सभी आस पास मे रहेते थे। हम सब बहुत अच्छे दोस्त बन गए। जब मै दस साल का था तब हार्दिक, जयदेव, जलपेश, और तन्मय भारत से अमेरिका नए नए आये।

पहले हम को यह नए लड़के पसंद नहीं थे और उनका बहुत मज़ाक किया। जब हम सब की दोस्ती हो गयी तब बहुत मज़ा आने लगा। गर्मियों मे हम सब रोज़ मिलते थे। कुछ दिन हम बास्केटबाल, बसेबल्ल, या फुटबाँल खेलते थे तो कभी कभी हम हमारी साईंकिलो चलाते थे।

जब सब बड़े हो गए तो दूर रहेने चले गए, लेकिन, हम सब आज भी बहुत अच्छे दोस्त है।

मेरे बचपन की स्मृतियाँ

मेरे बचपन में मैं हर रात (गर्मियों में) नौ बजे तक बाहर खेली बहन के साथ। हमने "बयक" या "रोल्ल्र स्केट" किया। अक्सर हमने "चौक" में सडक पर चित्र बनाया। कभी कभी हमने पिता जी की मदद की बगीचे में। जब हमने बगीचे में अच्छा कम किया, मेरे पिता जी ने मैं और मेरी बहन को "वील्बर्रो" में रखकर "पश" किया. हम उसे प्यार करती थी। बहन और मैं सबेरे से घर में नहाये की बजाय हम बाहर में "स्प्रिकलर" में खेले. कभी कभी हमारी पदोसियाँ हमारे साथ खेले.

जब मैं बहुत छोट्टी लडकी थी, मैं सभ्य थी। अक्सर, मैं अकेली बेटकर "पोट्स और पांस" के साथ खेली जब मेरी माँ ने पकाया. मैंने भी माता-पिता को हमेशा आदर किया. लेकिन मुझे दूध नहीं पसंद था. तो, एक बार, मेरी माँ ने बोला कि "अंकिता, अगर तू दूध नहीं पि, तो "पुलिसवाले" आयें." मैं बहुत दर लगी और इस लिए, आजकल मैं रोज़ दूध पीता हूँ.


जब मेरी उम्र आठ साल था, मैंने एक उपकार किया. मैंने मेरी बहन को "बयक" चढ़ना सिखाया. बहुत आशा में, मैंने उसको मदद कि दो घंटे के लिए पांच दिनों के लिए. बहन को इच्छा था कि वह पूरे पडोस में चढथी थी. अंत में, मेरी बहन ने यह ही किया. अब, "बयक" चढना मेरी बहन के लिए सरल है.

मेरा बचपन

मैं अपना बचपन बहुत प्यार से याद करता हूँ. मेरा परिवार में मैं बड़ा हूँ. सिर्फ चिराग मुझसे बड़ा है. वह तीन महीने से मेरा बड़ा है. लेकिन, वह मेरा भाई नहीं है, चिराग मेरा मामा है. मेरी मां और चिराग चचेरा भाई बहन हैं. थोडा साल के बाद, मेरी पीडी पुरु हो गयी. हम ८ बच्चे थे. मैं, मेरा छोटा भाई विजय, चिराग, अपनी छोटी बहन सपना, मयूर, अपनी छोटी बहन आरती, अखिल, और अपनी छोटी बहन कृष्ण. हम ८ कुछ करते थे. हर हफ्ते, हम किसी का घर जाते थे. बहुत मज़ा आये थे. हम खेलते थे, खाने थे, टीवी देखते थे, और मस्ती करते थे. हम बहुत मस्ती करते थे. एक दिन, चिराग का पुराना घर में हम एक नृत्य की पार्टी रखा था. हम दलेर मेहँदी का गीतों पर नाचते थे, और स्त्रोबे लिघ्ट्स रखा था.

लेकिन, सब कुछ एक दिन रोकेंगे. कृष्ण ने बहुत ख़राब अल्लेर्गिएस था, और वह कुछ वर्षो के लिए भारत गए, अपनी मामा के साथ रहेना. और अखिल और अपना माता पिता फिलाडेल्फिया गए थे. चिराग और सपना और अपने परिवार वार्रें से ट्रॉय में रहने गए. मैं और विजय और हमारा माता पिता फर्मिन्ग्तों से वेस्ट ब्लूम्फ़िएल्द रहने गए. और सुब का माता पिता बहुत व्यस्त बन गए थे. हर हफ्ते हर महीने बन गया, और अखिल हर गर्मी में मेरा घर में रहना आता था. लेकिन, हमारा पीडी में बहुत प्यार और दोस्ती है, और हर गर्मी हम पिकनिक में गए थे, और मेरा घर के पीछे सोकर खेलते थे.

आज, हमारा परिवार फिर एक साथ है. मैं, चिराग, अखिल, मयूर, विजय, और सपना इस उनिवेर्सित्य में जह रहे हैं. हम हर गुरूवार मोजो में खा रहे हैं.

मेरे बचपन की स्मृतिया

मेरा बचपन तो बहुत ही रंगीन था। मुझे मेरे बचपन की काफी कहानियाँ याद हैं और मेरे माँ - बाप मुझी बहुत कहानियाँ बताते हैं।
जब मैँ तीन या चार साल कि थी, मेरी ममी हर रोज़ काम के लिए छ: बजे उठती थी. और मैँ हर रोज़ ममी के साथ - साथ उठती थी क्योंकि मुझे मज़ा आता था जब ममी सजती थी। जैसे जब वे बालियाँ पहनती जाती थी और अपने चेहरे और होंठ">होंठ पर गुलाबी रंग लगाती थी। तो एक दिन जब ममी अपने दफ्तर">दफ्तर के लिए चले गयी, मैँ ने देखा कि ममी ने गलती से अपना लिपस्टिक ड्रेसर">ड्रेसर पर रख दी जहा मेरा हाथ पहुँच सकता था . मुझे बच्चों जैसी असामान्य">असामान्य आने लगी। मैँ काफी कोशिश के बाद ही उस लिपस्टिक का दखन को खोल पायी। तब मैंने लिपस्टिक के साथ थोड़ी खेली, मतलब मैंने पहेले उसको देखा तब कुछ हाथ पर लगाया। तब मुझे याद आया कि हर सवेरा ममी यह चीज़ अपने होंठ">होंठ पर लगती हैं। तो खुश होकर अपने चेरे पर लिपस्टिक लगाने लगीअसामान्य">। मुझे बहुत ही मज़ा आया, और एतना मज़ा आ रहा था कि मुझे पता ही नहीं चला जब मेरे ममी और पापा कमरे मैँ आये. वे मेरे पीछे खड़े होकर फोटो ले रहे थे। क्योंकि जब मैंने लिपस्टिक के साथ खेलना बंद कर दिया, मेरे पूरे चेरे पर लिपस्टिक ही लिपस्टिक था। ममी और पापा को बहुत हंसी आई क्योंकि मुझे मालुम था कि ममी लिपस्टिक कहाँ लगाती हैं लेकिन मैंने लिपस्टिक अपने होंठ">होंठ के अलावा हर जगा लगा दिया था। तो ममी का लिपस्टिक एक दम ख़राब हो गया था, लेकिन मुझेअसामान्य"> तो बहुत ही मस्ती आयी थी।

मेरी बचपन की स्मृतिया (सतीश मोहन)

मेरी ज़िन्दगी की आदि बहुत दिलचस्प का समय था. मैं सुरूप बच्चा था, तो कोई नहीं मुझे डान्टते. इस लिए मैंने छोटी छोटी उपकार करता था.

एक बार, जब मैं साथ-आठ साल था, मैं और अपना दोस्त विधालय खेल का मैदान में खेल रहे थे. मेरा दोस्त बहुत शरारती था. वह मेरा जैकेट का टोपी विधालय का छत पर फेंक दिया. मैं बहुत गुस्से में हो गया. वह भी हसने लगा. मैं चिल्लाया, "क्या कर रहा हो तुम? जाओ, मेरी टोपी ले आओ. अभी!" मेरा दोस्त ने कुछ नहीं बोला और दोड़ने लगा रहा था. मैंने भी उस का पिच्छा कर लग रहा था. दो-तीन मिनट के बाद, मैं उस पर कुद गया और वह निच्चे गिर गया. तत्काल मैंने उसे मरने और दांगने लगा था. मेरा दोस्त रोया और उस का घर को लोटा. मैंने अपना टोपी दोस्त से वापुस नहीं पा सका. जब मैंने घर जाकर दरवाज़ा खोला, मैंने अपना माँ खड़े देखा था. कह बहुत गुस्सी थी. वह देखकर मुझे पता है की मैं तकलीफ में था.

अगले दिन मैं अपना दोस्त का घर पर गया और माफ़ी मांगना पड़ता था. अब भी मैं गुस्सा था, लेकिन मैंने अपना दोस्त का 'सॉरी' बोला और हम ने हाथ मिलाये. मुझे पता है की वह उचित बात था. मेरा दोस्त भी 'सॉरी' बोला और उसने एक नया टोपी मुझे दिया. वह दिन से हम दोनों कभी नहीं मारे.

मेरा बचपन में बहुत सबक सीखा. आज वे सब मुझे अच्छी से उपयोग करता हूँ.

मारा बचपन

मैं अपने बचपन की अच्छी यादों के लीया बहुत कुछ है। मैं अपनी दादी के साथ हर रोज समाचार देखा। तो वह मुझे खाना बनाना होगा॥ मैं लोगों को प्रंक प्यार करता था। मैं अपनी बहनों को बालों में गम डाला तो उसका बालो मैं कैप करा। फिर मेरी माँ को पता चला और मुझे सजा दी। एक बार मैं कदम पर कील दिया और उन पर मेरी चाची चल गयई। मैं अपने बचपन में खेल का बहुत खेला। मैं बास्केटबाल खेलने जब मैं सात था और फुटबॉल जब मैं नौ शुरू करा था। मैं अपने बचपन में फिल्में देख प्यार करता था। मेरे पसंदीदा अल्लादीन और लिओन किंग थे. मैं भेई हिडे एंड गो सीक और ताग भहृत खला था। स्कूल के बाद, मैं और मेरे दोस्तों के खेल तक अंधेरा होता था। मैं अपने बचपन में पढ़ा की तरह नहीं था। मेरी माँ ने मुझे करना होगा। मैं कारों प्यार करता था। इसलिए मेरे पिताजी मुझे गाड़ी में ले हर साल दिखाते हैं। मैं शनिवार की सुबह कार्टून प्यार करता था, मेरा पसंदीदा पॉवर रंगेर्स था। मारा पास कुछ खिलौन और कोस्तुमे हो थी। मारा पास बहुत अच्छा बचपन था। काश मैं वापस जा सकते हैं।

मेरा बचपन बहुत ही अच्छा था इसलिए मैं अपना परिवार को बहुत याद आती हैं मेरा परिवार में अपनी बहन और माता-पीता हैं मेरा सबसे बड़ी स्मृतियाँ मेरा कुत्ता था बचपन में मेरा कुत्ता का नाम सनदी था वह मेरा सबसे अच्छा दोस्त था क्योंकि मेरा साथ-साथ हर जगह गया बहुत अच्छा कुत्ता था वह सुभी कुछ शब्द सुना था, बहुत साफ़ जानवर था, और छोटे बच्चे के साथ धीरे था जब मैँ चौधाह साल की थी मेरा कुत्ता मर गया क्योंकि बहुत पुराना था. दो महीने के बाद मेरा परिवार ने नया पिल्ला घर को लाया. उसके नाम मिकी था क्योंकि उसके पुरे शरीर कला था और उसके पैर, हाथ, और पूंछ सफ़ेद था. मिकी बहुत प्यारा कुत्ता था लेकिन बहुत शरारती था. हर दिनों वह स्नानघर से कचरा खाता था, सोफा में होल बनाता था, और रसोईघर में हमारा खाना खाता था. बचपन में मै और मेरा परिवार बहुत अवकाश पर चले गया. मेरा मन पसंद अवकाश डिस्नी लैंड था क्योंकि वहा बहुत चीज़े करने सकते है. मेरा बचपन मै एक खास सहेली था. हम अब भी दोस्त है. वह अब ग्रांड वल्ली उनिवेर्सिती में पढती है लेकिन हर हफ्ते हम फोन पर बात करती है. हर रविवार को मै और मेरा मम्मी दोपहर में बहुत अच्छा खाना खाकर एक फिल्म देखती थी. मुझे अपनी मम्मी बहुत प्यार करती हु क्योंकि मेरा मम्मी मेरे लिए बहुत करती है. बचपन में मै पिता जी के साथ बहुत खेल खेलती थी. पिता जी ने मुझे बास्केटबाल, फूटबाल, और टेनिस सिखाया.

मेरा बचपन

मेरा बचपन बहुत मज़दर था। मेरा परिवार में थीं बचे थे। मेरा बड़ा भाई और मेरी ट्विन बहन। बचपन में मेरा परिवार फर्मिन्ग्तों हिल्स में रहेता था। मेरा परिवार ८ साल यह घर पर रहेता था। थीं ग्रेड में मैं १३ मिले मोवे किया क्योंकि फर्मिन्ग्तों हिल्स अब तक में रहेता था। नई घर नजदीक से मेरी खास सहेली भी रहेती थी। हर दिन हमे भार खेला। हमे ४-स्कुँरे और बस्कत्बल्ल खेलता था और भिक रायीद करता था। कभी-कभी हमे क्रोगेर जाता था और कुछ कंडी खरीदी थी। मेरा पुराना घर का बच्क्यार्ड में एक "स्वींग-सेट" था और हर दिन मैं और मेरी बहन खेलता था। कभी मेरी माँ को हमे "स्वींग-सेट" पर भोजन करती थी। मेरा पसंदीदा चुटिया "डिस्नी-लैंड" था। मैं और मेरा परिवार और मेरा चचेरा भाई और बहन भी आया था। वहा हमे बहुत रोलर कोस्टर पर गया था और डिस्नी पात्र से मिला। हमे बीच भी गया था। मेंने नाढ़ी बहुत पसंद है और मैं बहन के साथ-साथ संद में खेला। हमे बहुत मज़ा आया था। बचपन में मेरी पास एक पक्षी था। पक्षी का नाम अय्न्जल था। वह कोच्कतैल था और बहुत छोटा था। मैं बहुत प्यार करती थी क्योंकी मेरी माँ मेरा मसि ने दिया। अय्न्जल के बाद मेरी माँ पेट नहीं लिया क्योंकि मुझे पेट चाहिए। थीं ग्रेड में नाचना का क्लास ज्वाइन किया। मेरी शिक्षक का नाम रक्षा दावे था। में ११ साल रक्षा औंटी के साथ नाची। हर साल मैं गुर्मी में फोगना में रहती थी। मेरा टीम हर साल फर्स्ट प्लेस में आया था। मेरा गुर्मी बहुत पसंद था इसलिये मुझे फोगना बहुत पसंद था और मेरे खास सहेलियों के साथ-साथ नाचती थी.

मेरा बचपन

मुझे आपना बचपन बहुत अच्छा लगता हेँ। मैँ मिचिगन में पढ़ा हुई। मेरा सौथ्फ़िएल्द का बेऔमोंत ओस्पितल में जनम हुआ। वहाँ पर मैँ दो साल तक रही और तब हम सब फर्मिन्ग्तों हिल्स में रेहना आये। फर्मिन्ग्तों हिल्स में हम लोग का पास एक बहुत आचा घर हेँ जिसमे मैँ आभी भी रेहती हूँ। इस घर में एक बहुत बड़ा लॉन हेँ जिस में मैँ और मेरी परोसी खेलते थे। कभी-कभी हम चुप चुपना वाला खेल करते थे, या हम आपना साइकिल पर आलग ज्गे जाते थे। इन सब खेल में मुझे बहुत मज़ा आता था। जो मेरे परोसी थे वे मेरे बहुत खास दोस्त बन गए थे। मेरे परोसी दो लड़के और एक लड़की थे। लेकिन जब मैँ दस साल की हुई, उन लोग को आपनी मामी के सात रेहने जाना पड़ा क्योकि उन का बाप का मौत हो गया था। फिर तब भी वे मुझसे मिलने आते थे कभी कभी।

मेरे बचपन मैँ मुझे भर खेलने में बहुत मज़ा आता था। कभी कभी मैँ स्विंग्स पर जाती थी, या बास्केटबाल खेलती थी। मुझे लगता हेँ की मेरी मामी मुझे भर भजति थी क्योकि मैँ बहुत बदमाशी करती थी जब मैँ अंदर आती थी घर मैँ। मुझे टीवी देखने का शौक जजा होता नहीं था, तो मैँ आपना जूट-मूत खेल बनाती थी आपने गुडीयोँ के सात। तब मैँ अकेली बच्ची थी तो और घर में खेलने वाला नहीं था। तब जब मैँ साथ साल की थी, तब मेरी बहन हुई। उसका नाम उर्वशी हेँ। अब तो वह बारह साल की हेँ। जब वह छोटी थी, तब मैँ उसका बहुत देख भाल करती थी। मैँ उसे बहुत प्यार करती हूँ। कभी कभी वह मेरे लिए एक बड़ी गुड़िया के जेसे थी जिस को मैँ बहुत कहानिया सुनाती थी। आभी भी वह कभी कभी एक-दो कहानिया सुन लेती हेँ। मेरे दोस्त और मेरी बहन के वाजे से मेरी बचपनी बहुत अच्छी थी। कभी कभी जब मेरे पास बहुत काम हो जाता हेँ, मैँ उस सयम में वापस जाना चाहतइ हूँ।

मेरा बचपन की यादे

मैं हमेशा अपने बचपन याद करती हूँमुझे याद है की मेरे बचपन में मैं बहुत बोलनेवाली थीमैं हमेशा सवाल पूछ रही थी. "यह क्या है?" "ऐसा क्यों है?" "यह कैसे चलता है?" मैं सब कुछ समजना छठी थी. मुझे सब कुछ देकना, सूना, और स्पर्श करना पसंद थाकोई बार, अपनी माँ मुझ पर नाराज़ हो जाती थी क्योंकि मैं बहुत सवाल पूछ रही थी. कहती थी,"अगर तू दस मिनट के लिए मून बंद रख सकती है, तोह में तेरे लिए जादू करुँगीतब में सच में कोशिश कि की मैं कुछ बोलू, लेकिन पांच मिनट के बाद मैं हमेशा भूल जाती थी, और कुछ बोलती थीलेकिन माँ सिर्फ हस्ती थी

मुझी याद है कि बचपन में मैं बहुत शरारती थी. मेरी एक बेहें है, स्वाति। वह मुझसे चार साल बड़ी है। बचपन में, मैं उनके साथ खेलना बहुत छठी थी। लेकिन वोह और उनके सहेलिया मेरे साथ नहीं कलना छठी, और भाग जाती थी। मैं उनके पीछे दोरती थी, लेकिन मैं जल्दी थक जाती थी। उसके बाद में अपने माँ से रोई, कि स्वातिदीदी मेरे साथ नहीं खेल रही थी. माँ स्वाति को सम्जाती थी कि मैं छोटी हूँ, औरअपनी बेहें के साथ खेलना चाहिए। तब में मुस्कुरायी।


बचपन में मुझे फिल्म देखने बहुत अच्छा लगता था। मेरा परिवार बहुत हिंदी और डिस्नी फिल्म देखते थे। बचपन में मेरी मन पसंद फिल्म थी हम आपके है कौन, और “अलादीन”। मैं छठी थी कि एक दिन मैं एक बड़ी फिल्म स्टार बनुगी। अब मुझे फिल्म स्टार बना कोई इच्छा नहीं है, लेकिन फिल्म देकना अभी भी बहुत पसंद है।

मेरे बचपन की स्मृतियाँ

जब मैं छोटा था तब मैं बहुत तोफान करता था। एक दिन जब मैं चार साल का था, मेरी माँ दफ्तर गयी थी और मैं अपने दादी के साथ घर था। हम किताब में कलोरिंग कर रहा था। उसके बाद मैंने बाथरूम जाके लाल रंग से मेरा नाम बड़ा लेटर्स में सभी दीवारे पर लिखा। मेरी माँ घर लौटकर बहुत घुसी हुई थी लेकिन में ने अनादर तरह से हंसा। मुझे साफ़ करने पड़ा और बहुत कठिन काम हुआ था।

एक बार मैं कुछ मशीनों को उपयोग करना चाहता था लेकिन मेरे पास कोई बुद्धि नहीं था क्योंकि मैं नहीं कर सका। इसिलीये मैं ने पाताल पर फेंका और थोड दिया। 111

बचपन में मैं अपना पिताजी के साथ चेस खेलता था लेकिन छोटा साल में मैं हमेशा हरता था। मेरी इच्छा जीतना का था इसके लिये मैं रोज खेलने लगा और एक साल मैं मास्टर बन गया। मेरा दोस्तों ने बहुत कोशिश किया था मुझे हराने से लेकिन नहीं कर सका। पूरा स्कूल में मैं चम्पिओं बन गया लेकिन अब में नहीं खेलता हु।

बचपन का हर गर्मी में मैं सॉकर टीम में भाग लेता मेरा खास दोस्तों के साथ। अभी ताक मेरा मन पसंद खेल सॉकर ही है। मेरा पिताजी हमेशा कुछ संतरे लाते हाफ्तैम के लिये। दादा, दादी, छोटा भाई, और माँ हर खेल में आते और झोर से मेरा नाम चिल्लाहते।

मेरा बचपन

बचपन में, मैं इंग्लैंड में रहती थी। उधर मैं एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ती थी। उधर हम उनिफ़ोर्म पहनते थे। बहुत सारे उनिफ़ोर्म थे। ठंडी के लिए, गर्मी के लिए, तैरना के लिए, और बाहर खेलने के लिए अलग-अलग उनिफ़ोर्म पहनते थे। इंग्लैंड की स्कूल और अम्रीका की स्कूल में बहुत फर्क है। उधर, बहुत लोग पब्लिक स्कूल में नहीं पढ़ते हैं। इधर, ज्यादा लोग पब्लिक स्कुल में पढ़ते हैं क्योंकि सिस्टम अच्छा है। इधर, झीधर भी जाओ, हर स्कूल में अच्छे शिक्षक होते हैं। उधर ऐसे तो नहीं है। इस लिए, मेरा स्कूल घर से बहुत दूर था। हर सुबह, मेरा पिता मुझको स्कूल तक चोर देते थे और तब दफ्तर पर जाते थे। शाम को, जब माता मुझको स्कूल से उतारते थे, वह हमेशा मेरे लिए कुछ चोकोलेट की कुछ लाते थे।

जब मैं छोटी थी, मैं हमेशा अपने सहेलियां के साथ बहार खेलती थीं। हम साइकिल में घूमते थे और बगीचा में खेलते थे। छोटे छोटे चीजें में मज़ा आते थे। हम कभी कभी अपना माता-पिता के साथ शहर में घूमते थे। हर सप्ताहांत, हम शहर में अच्छे जगे में खाते थे। कभी हम हिन्दुस्तानी खाना खाते थे और कभी हम ब्रिटिश खाना खाते थे। इंग्लैंड में बहुत अच्छे खाने के जगे हैं।

बचपन में छोटे चीज़ करने में मज़ा आता था। अभी भी, जब भी मैं इंग्लैंड जाती, मैं यह ही चीज़ करती हूँ क्योंकि ये सब करने में, अपना बचपन का याद आता है।

मेरा बचपन की कहानी

मेरा बचपन बहुत ही अच्छा था। मेरा सारा बचपन मिशिगन मे था। मेरा जनम वोरें मे हुआ। वोरें मे कुछ ख़ास नहीं किया था। जब मे दो साल का था, मेरा परिवार एक एपार्टमेंट से एक तौन्हौस मे रहना गए। वहा भी कुछ ख़ास नहीं किया था, लेकिन बहुत ही मजेदार था। जब मैं चार साल का था, मेरा परिवार भारत और मैं भारत गए थे। वहा, मेरी माँ, बहन, और मैं, चार महीने रहे। वहा मेरे चाचा और मोसी के घरो मैं रहे थे। मुझे बहुत मज़ा आय था.जब में पांच साल का था, मेरा दाहिना हाथ दो जगहे टूट गया था। मेरा हाथ टूट गया था क्योंकि में साइकिल चला रहा था और दूर से मैंने अपने दोस्तों को देखा। दूर से मैंने मेरा उठाया। हाथ उठाकर मैं फूटपाथ से गिर गया। मैं मेरी कोहनी पर गिरा, और वहा मेरी हड्डी टूट गयी। मुझे स्कूल जाना बहुत ही अच्छा लगता था क्योंकि वहा के शिक्षक अच्छे थे और मेरे बहुत सारे दोस्त भी थे। स्कूल में हम बहुत जगहे गए। चिड़ियाघर, कार्निवल, ट्रेवर्स सिटी, सिदरपॉइंट गए थे। स्कूल के लिए बहुत सारे खेल भी खेलता था। बास्केत्बोल, फुटबोल, और दो तिन दुसरे खेल खेलता था। जब मैं तेरह साल का था, मेरे दो चाचे, और मोसी आये। वे हमारे घर मे रहते थे। फिर उस गर्मियों में हम एक घर देखने लगे। अक्टूबर में हम ट्रोई में चल गए। वहा वोरें जेसा मजेदार नहीं था, लेकिन ट्रोई में मजा भी आया था। ट्रोई मैं बहुत दोस्तों नहीं थे। मेरे सारे दोस्त वोरें में रहे। उस लिए मुझे थोडा सा लगा। और अभी मैं एन आर्बर में एक छात्र हूँ।

मेरा बचपन

मेरा बचपन बहुत अच्छा था. मै अपने परिवार में सबसे बड़ी बच्ची हूँ. मेरी एक छोटी बहन, औद्री, और एक छोटा भाई, हर्ष है. औद्री का अपनाम "औद-बाल" है, और हर्ष का अपनाम "चीक्स" है.

हम एक छोटे नगर, स्प्रिंग-फील्ड, ओहायो, में रहते थे. बचपन में मै अपनी बहन के साथ बहुत खेलती थी. हमको "बार्बी" गुडिये पसंद थी. हम कभी-कभी एक खेल, "घर," खेलते थे. हम छल करते थे कि मेरी बहन "माँ" हुई, मेरा भाई "बेटा" हुआ, और मै "बेटी" हुई. हमको पढ़ना भी अच्छा लगता था. मेरी पसंदीदी किताब "हरी पोटर" थी.

कभी-कभी, हमारी आया हमारा देखभाल करती थी. उसका नाम आलिसुं था. मेरा भाई और मै उसके कुते को सवारी करते थे, क्योकि यह बहुत बड़ा था. एक बार, आलिसुं ने मेरी बहन और मुझसे स्पगेटी बनवाया. स्पगेटी जल गयी, और आलिसुं नाराज़ हो गयी. अल्लिसुं के घर में, हमने फिल्मे देखी, और उसके कमरे में हमने बहुत संगीत भी सुना. एक बार दिसम्बर में, अल्लिसुं और मेरा परिवार "नुत-कराकर" नाटक देखने गए. कुछ साल बाद, आलिसुं विश्वविद्यालय गई, और हम उससे मिलने गए.

मेरी बहन, मेरे भाई, और मुझको "डिस्नी" बहुत पसंद था. बचपन में, हमने बहुत डिस्नी फिल्मे देखी -- मेरी पसंदीदा फिल्म "छोटी मत्स्यकन्या" हुई. मै और मेरा परिवार चार बार "डिस्नी वर्ल्ड" फ्लारिदा में गए. मेरी बहन और मुझको "डिस्नी राजकुमारियों" से मिलना बहुत अच्छा लगता था. डिस्नी में, हमने बहुत रेस्टोरेंट में खाना खाया.

बचपन में, मै बहुत खेलती थी. मुझको फुटबाल पसंद था, लेकिन मेरा पसंदीदा खेल तैरना था. मै "वाई. एम्. सी. अय." में तैरने की क्लास जाती थी. मै अपने तरणताल पिचावाड़े में भी तैरती थी. मुझे टेनिस भी पसंद था, लेकिन मेरे टेनिस के कौशल बहुत खराब थे.

हर रविवार को, हम अपनी माँ के साथ चर्च जाते थे, और तब हम अपने पिता के साथ मंदिर भी जाते थे (मेरी माँ मसीहा हैं और मेरे पिता हिन्दू हैं). हिन्दू स्कूल में, हमने बहुत श्लोक और कुछ गाने (जैसे "हनुमान चालीसा" और "शीवा शीवा शीवा शम्बो") सिखे. एक साल, हमने "रामायण" नाटक किया. एक साल, मै सीता हुई.

मुझे अपने जन्मदिन की पार्टिया याद है. एक साल, मेरी जन्मदिन की पार्टी "बार्बी गुडियों" के बारे में थी. मेरी माँ ने मुझको एक "बार्बी" केक पकाई! मै और अपने दोस्त गुडियों के साथ खेले, और हमने पिज्जा खाया. एक साल, मेरी जन्मदिन की पार्टी एक गेंदबाजी के स्थान में हुई.

मेरा पसंदीदा शौक रेखाचित्र था. एक बार, मैने दो बड़ी तस्वीरे बनायी और मैने अपनी नानी और दादी को दी.

मुझको अपनी नानी और दादी से मिलना भी पसंद है. मेरी नानी सिंसिन्नाती में रहती हैं. वे हमको बहुत कहानिया सुनाती थी. कभी-कभी वे हमको कूकीस बनाती थी. मेरी दादी मेरे चाचा के साथ कोलुम्बुस में रहती हैं. उन्होंने मुझे जोड़ना सिखाया, और कुछ हिंदी सिखायी. वे हमको चपाती और दाल पकाती थी. समस्त रूप से, मेरा बचपन बहुत खुश था.

मेरी बचपन

मेरे बचपन बहुत ही खुबसूरत था। इसके बारे में, मेरे पास सिर्फ अच्छी स्मृतियाँ हैं। रोज़ मैं मेरी छोटी बहन के साथ खेली थी क्योंकि हम दोनों तब और अभी सबसे अच्छी सहेलियां हैं। मुझे मेरी बहन को खूब चिढ़ाता पसंद था तो इस लिए हम कभी कभी हम दोनों झगड़ती थी। जब मैं बहुत छोटी थी, मैं खूब दुष्ट थी। मुझे यहाँ-वहाँ दौड़ना पसंद था और सब समय मेरी पिताजी को मुझसे पकड़ने पड़ा।

बचपन में मेरी दादी हमारे साथ रहती थी। मुझे याद है की मैं और मेरी बहन उसकी साथ सेकती थी। हमने सब कुछ बनाया - बिस्कुट, केक, सन्देश। मेरी दादी बहुत ही प्यारी औरत थी और मुझसे बहुत चीज़ें सिखाती थीं। मैं उसको कहानियाँ बोलती थी और वे मेरे लिए लिखती थी क्योंकि मैं छोटी थी और मैं लिखने नहीं जानती। मैं और मेरी बहन को भी उसका खाट पर उचालती थी।

जब मैंने "किन्देर्गारतें" गया, मैंने खूब किताब पढ़ने को शुरू किया। बचपन से, मेरी माँ मेरे साथ पढ़ती थी। कभी न कभी हम बोर्देर्स गया किताबें खरीदने के लिए और घर पहुँचकर, मैं किताब पढ़ने को ख़त्म हुआ! मेरी मन पसंद किताबें राज़ की कहानियाँ थी । बचपन में, मैंने भी भरतनाट्यम और पिआनो सिकने आदि किये। मुझे नाच खूब पसंद था और इस लिए मैं अभी तक नाचती हूँ। पिआनो बजाकर, मैं संगीत प्यार करती हूँ। एलेमेंतारी स्कूल में, मैं खूब चुपचाप थी लेकिन मुझे खेलने को बहुत ही अच्छी लगती है।

हर सप्ताहांत मैं मेरा परिवार के साथ चिन्मय तपोवन गए थे। वहाँ, मैं हिन्दुत्व के बारे में सीखती थी और दोस्त मिलती थी। मैंने लोग और परमात्मा को कैसे आदर करने सिखा और मेरी संस्कृति के बारे में भी सिखा । चिन्मय तपोवन में सब लोग दूसरी लोग को प्यार करते हैं । मैं यह सब खूब "मिस" करती हूँ क्योंकि मैंने उस दिनों में नहीं "अप्प्रेसिअते" किया।

- नीना

मेरा बचपन

मेरा बचपन बहुत ही खुशगवार था। घर में सबसे छोटा था इसलिए काफी प्यार और दुलार मिला। जब मैं पैदा हुआ था मेरे बड़े भाई की उम्र नौ साल की थी। मेरे माता पिता के इलावा मेरे भाई का भी काफी प्यार मिला। हम दोनों टीवी देखा करते थे। दुच्क्तालेस, पॉवर रंगेर्स और सिम्प्सोंस मेरे पसंदीदा शो थे।
प्रेस्कूल में मेरा सबसे अच्छा दोस्त जैक और मैं हमेशा साथ खेलते थे। हमारा पसंदीदा शो पॉवर रंगेर्स था तो हम अक्सर पॉवर रंगेर्स का नाटक करते थे। बड़ा मजा आता था। हम दोनो रोज झूला भी झूलते थे। प्रेस्कूल ग्रदुअतिओन में जैक और मेरी दोस्ती सबसे अच्छा दोस्ती का अवार्ड मिला।
जब मैं एलेमेंतारी स्कूल में था तब पढाइ में अच्छा करने के साथ में बहुत मजे भी करते था। मुझे रीसस बहुत पसंद था। क्लास में शो एंड तेल (देखाई और बोलना) करने मुझे बहुत दिलचस्प लगता था। एक शो एंड तेल के लिए में अपने बतख के बच्चे को स्कूल लेगाया था। बतख के बच्चे का नाम मैंने चकी रखा था। चकी क्लास में दोरने लगा। मेरे शिक्षाख और बच्चों को यह बहुत पसंद आया। सब मुझे चकी के बारे में सवाल करने लगे। वह क्या खता है, कहाँ सोता है और उसकी माता कहाँ है। दुसरे क्लासके विधारती भी चकी को देखने मेरे क्लास में आये। मेरा दिन बहुत मनोरंजक था। बचपन मुझे दोस्तों के साथ स्पोर्ट्स खेलना भी बहुत पसंद था। हम रोज स्कूल के बाद बस्कित्बल्ल, बेसबाल, फुटबाल, और हक्की खेलते थे। कभी कभी खेलने के बाद हम स्लीपोवेर्स भी करते थे। हम एक दोस्त के घर रात में रह जाते थे। रात में सोते कम और खेलते ज्यादा थे। बहुत मस्ती करते थे। अक्सर अंग्रेजी फिल्में के विडियो देखते थे। लिओन किंग हम सब की पसंदीदा फिल्म थी। मेरे भाई और दोस्तों के साथ हस्ते खेलते गुज़रा।

काम और खेल

मेरे बचपन में याद करती हूँ कि हर शाम को भाई-बहनें ओर मैं साथ साथ घर साफ़ करते थे | हम ने एक खेल इजाद किया और जब हम घर साफ़ करते थे तब यह खेल खेलते थे | इस खेल का नाम "फ्लैट सुर्फसुज़" और खेल के नियम बहुत सरल था लेकिन यह खेल अजीब था और इस लिए समझाना थोड़ी सी कठिन है | हर किसी को एक कमरे साफ़ करने पड़ते थे और जब साफ़ कर रहे थे तब कमरे वाला था (you were owner of the room you were cleaning)| अगर कमरे वाला कोई और अपने कमरे में फर्श छू रहा है देखे तो कमरे वाला आदेश दे सके है | अक्सर कमरे वाला कहते थे कि दूसरा भाई बहन पांच मिनट के लिए कमरे वाले का कमरे में साफ़ करना पड़ता था.
जब हम "फ्लैट सुर्फुसुज़" खेल रहे थे हमको घर साफ़ करना पड़ते थे | हमारी माँ अनाज्घर में थी और हर १५ - २० मिनट वह घर आकर देखने कि सब ठीक हो जाता था | इस लिए किसी खिड़की के नजदीक "ब्रूम" (कूचा) के साथ खड़ा रहता था और अगर माँ देखे तो चिलाकर फर्श बुहारने लगता था |

बचपन में मेरी भाई-बहनें और मैं मकई बड़ा खेत से खेत काटे थे | मेरे परिवार के पास बहुत एकड़ मकई | मेरी माँ एक कहानी कहती थी कि एक सुरूप "मकई की पूरी" थी और अगर हम सारे खेत से मकई खेत काटे तो मकई की पूरी हमारे लिए मिठाई देते थे | हर साल मेरी माँ एक पहेली लिखती थी और अगर हम पहेली खोले तो मिठाई मिलते थे |

बचपन में बहुत ज्यादा कपड़े धोती थी | हर दिन मुझको और अपनी दो बहनें को कपडे धोने पड़ते थे | सवेरे को हम कपडे धोती थी, उसके बाद हम "लाइन" पर कपड़े लटकाती थी और दोपहर में घर के अन्दर लाकर कपड़े तह करती थी | हम हर दिन यह "रूटीन" ऐसे करती थी |

बचपन में बहुत सारे काम करती थी लेकिन मेरा बचपन बहुत मजेदार ओर खुश रहता था |

Saturday, 23 January 2010

आशिमा की बचपन की स्मृतियाँ

मेरा बचपन बहुत ही रंगीन था। मेरा जनम अंगोला, इन्दिअन में हुआ था। में एक साल की थी जब मेरे माँ और पिता जी मिशिगन आये थे। जब से में मिशिगन में ही रह रही हूँ। मुझे यद् है की बचपन में मै आपनी छोटी बहन को बहुत तंग करती tही। मेरे बहन के बाल बहुत छोटे ते तोह में हमेशा उसका मजाक बनाती ती और उस को लड़का पुकारती थी। मै आपनी बहन के संग अलग अलग तरीके के खेल खेला करती थी। हम दोनों गुड़ियाँ से खेलते थे। हमे डांसिंग का बहुत शौक था। हम हमेशा शारुख खान की फ़िल्में देक्खर उसके घंनों की नक़ल करा करते थे। बचपन में मै बहुत जगह घूमी हूँ आपने परिवार के संग। जब मै आत साल की थी मै भारत और डिस्नी वर्ल्ड गयी थी। मुझे भारत के बारे ज्यादा याद नहीं है लेकिन मुझे यह याद है की मुझे छिपकली और बंदरों से बहुत डर लगता था। मेरी माँ मुझसे कहती हैं की मै बचपन मै बहुत सीधी सधी लड़की थी। कभी कभी मै शेतानी करती थी। जब भी मै आपने मौसी के घर जाती थी मै उनके दिनिंग टेबल के निचे चुप जाती थी। जब मेरी माँ मुझे पुकारती थी मै हस्ती थी और टेबल के निचे से नहीं निकलती थी। एक बार जब मै छोटी थी तो मुझे यद् है की माँ और पिता जी मुझे शौपिंग माल लेगे थे। मै माल मै आचानक से घूम हो गयी। मेरी माँ ने देखा की मै एक खिलोने की दुखन मे एक गुडिया से खेल रही थी। मेरा बचपन बहुत ही खुशील था। मेरे बचपन की यादें हमेशा मेरा साथ रहेंगीं।

मेरी बचपन की स्मुतियाँ

बचपन में मेरी दादी और मेरी परनानी मेरे माता पिताजी के साथ रहते थे. मेरे माता पिताजी हर रोज़ काम पर जाता था और मेरी दादी और परनानी मेरी ख्याल रखता था. हम "हिय्द एंड गो सीक" और "गो फिश" अधिक खेलते थे. हम रोज़ भगवन की पूजा और आरती किया और वे मुझे बहुत भजन सिखाया. जब मैं चार साल की थी, मुझे आठ भजन पता था! कभी कभी हम बालकोनी पर बैठकर हाई स्कूल छात्र के साथ खेलते थे. वे हाई स्कूल छात्र हर रोज़ "मकदोनाल्ड्स" जाकर मेरे लिए "किड्स माल" की तोय लाए थे. जब तक मेरी दादी "फ्य्सिकल ठेराप्य" के लिए बाहर जाती थी, तब मैं और मेरी परनानी खाने पकाते थे. क्योकि मैं बहुत छोटी थी, मैं ज्यादा काम नहीं कर सकी लेकिन परनानी मेरे लिए हमेशा छोटा काम देती थी. वह मुझे पानी और तेल उपाय करने मदद देती थी. मेरी बचपन में मेरा परिवार बहुत यात्रा करते थे. हम ट्रॉय मिचिगन बहुत आये थे क्योकि मेरे नाना और नानी वहा रहते थे. मेरी मासी और मामा-मामी ऍन अर्बोर में रहते थे, कॉलेज के लिए. मेरी दूसरी मासी वेस्ट लाफयेत्ते, इन्दिअन में रहती थी. इस लिए मैं, और मेरे माता पिताजी बहुत ज्यादा देखभाल के लिए जाते थे. में आठ साल थी तब हम मिचिगन में खिसकाना थे. मुझे मेरी नयी स्कूल बहुत पसंद थी और में बहुत पढती थी. कभी कभी मेरी बचपन मुझे बहुत याद आती है.

Wednesday, 20 January 2010

Wednesday, 13 January 2010

सर्दियों की छुट्टियाँ और मैं

मैं सर्दियों की छुतियों में हिन्दुस्तान गयी थी. सोला घंटों के सफ़र के बाद में दिल्ली पहुँची. दिल्ली पहुंचकर देखा कि मेरा सामान बदकिस्मत से नहीं पहुंचा! मैं बहुत गुस्सा हुई और मैंने बिना वक़्त ज़ाया किये हुए एक कोम्प्लैंत लिखवाई. तीन दिन बाद मेरा सामान अंतत: पहुंचा और मैं बहुत खुश हुई.
दिल्ली में मेरा पूरा विस्तार परिवार छुतियों के लिए आया था. मैंने उनके साथ बहुत वक़्त बिताया. अपने भाई-बहनों के साथ में हिंदी फिल्में देखने जाया करती थी. मेरी सबसे मनपसंद फिल्म थी "तीन इदियाट्स". वह एक बहुत ही मज़ाकिया फिल्म थी और अभिनेता आमिर खान ने मुझे बहुत हसाया!
हम लोग रात भर जगे रहते थे और हमने खूब बातें भी की. मैं अपने पूरे परिवार के साथ नैनीताल के "जिम कॉर्बेट" राष्ट्रीय पार्क भी गयी थी. वहां हमने एक पशु सफारी की और अनेक जानवर देखें जैसे की हाथी, हिरण, बाघ, सूअर और पक्षीवगैरह. रात को होटल के लोग जगह जगह अलाव लगा देते थे और हम सब अलाव के चारों ओर बैठ कर गाने गाते थे और एक दुसरे को कहानियां सुनते थे. मुझे बहुत अच्छा लगा अपने परिवार के साथ वक़्त बिताकर.
फिर हम कुवैत वापस चले आये. घर आके एक सुकून मिला! मैंने घर पर बहुत आराम किया और माताजी के हाथ का खाना भी खाया. मैं अपने स्कूल के दोस्तों से भी मिली और उनके साथ समय बिताया. हम लोगों ने कपड़ों की खरीदारी की और मैंने नए साल की पार्टी के लिए एक बहुत सुन्दर ड्रेस ख़रीदा. मेरी बहन के परीक्षाएं चल रहीं थीं तोह मैंने उसको पढाया.
सब मिलाकर यह एक बहुत ही रोचक छुट्टी थी!

Tuesday, 12 January 2010

मेरी छुट्टी

मेरी सर्दी की छुट्टियों अतारह दिसम्बर को शुरू हुई। में ने छुट्टियाँ अपने परिवार के साथ गुज़ारा। दो तीन दिनों तक क्रिसमस की खरीदारी और पार्टियों होती रहीं। मुजको क्रिसमस दिन बहुत अच्चा लगा। सब लोग को काफी मजा आया, सबने फिल्म देखीं और अच्चा स्वादिस्ट खाने बने। घर के हर आदमी ने अपनी पसंद का खाना तेयार किया। छुटटीयों में मेंने पुराने दोस्तों के साथ काफी समय बिताया। हम सब दोस्त सिनेमाघर फिल्म देखने गए। हम सब ने कई बार रेस्तारौंत में खाना भी खाए। हम बास्केटबाल और फूत्बल्ल भी खेलें और सब को बहुत मजदर लगा।
नया साल बनाये के लिए में अपने परिवार के साथ शिकागो घुमने गया। हम सब ह्यात्त होटल में ठहरे। दिन में मेरी माँ हममें कपड़ा की खरीदारी के लिए लगाई। मैं ने अपने लिए बहुत सारे कपड़े खरीदें। वहां के मॉल और दुकाने बहुत सुन्दर ते। हम सब को वहां घुमने में बहुत मजा आया। रात में हम देवों स्ट्रीट पर चलें। वहां काफी सर्दी थी, फिर भी तरह तरह की हिन्दुस्तानी दुकाने में सामान खरीदना अच्चा लगा। मैं पान की दूकान में मीता पान खरीदा। वह पान स्वादिस्ट था। चार दिनों के बाद हम वापस मिशिगन आये। शिकागो के सफ़र के बाद मैं दो दिन आराम किया। मैं फूत्बल्ल गेम तेवे पर देखा। मेरी सर्दी की छुट्टियों बहुत व्यस्त थीं।

Monday, 11 January 2010

जेकब की छुट्टियाँ

मेरी छुट्टियाँ में मैं अर्जेन्टीना दो सप्ताह पर गया. मरी बहन वहाँ छ मास पर रही है. वह पढ़ रही हैं. मैंने स्कूल में दस साल पर स्पैनिश की भाषा पढ़ी थी, थो मैं ठीक हूँ. हम दोनों बुएनोस आइड़ेस में जा रहे थे. हमने बहुत शापिङ की. मैंने बहुत चाय खरीदी, और मेरी बहन ने बहुत कपड़े खरीदे. उसकी चाय बहुत अलग है, लेकिन अच्छा है. हम दोनों ने बहुत उपहार खरीदे. हमने बहुत खाना खाया भी. खाना वहाँ ठीक है. उसका शाकाहारी खाना बहुत अच्छा नही है. हमने एक बार बहुत अच्छा चीना खाना खाया. हमने गुलाबी मकान देखा. दो हाफ़्ते के बाद, मैं वापस आया. मैंने मेरी हवाई जहाज़ मिस की और मैं दस घंटे पर हवाई आड्डे में बैठा. अंत में, मैं घर पहुँचा, और मैं सकूल गया.

मेरी सर्दी की छुट्टिया

मेरी सर्दी की छुट्टिया में मैं ने आपने परिवार के साथ बहुत वक़्त बिताया. मेरे परिक्षे कथम करके मैं, मेरे माता-पिता, मेरी बहन और मेरा बुआ-फुआ के साथ न्यू ओरलेंस गयी थी. वहा हम एक रेसोर्ट में एक हफ्ते के लिए रहे थे. पहले दिन हम ने आराम किया, निचे गरम पानी की पूल में बेटा, और उसके बाद पुराणी हिंदी फिल्म देखी: गुइदे. उसके बाद हम ने न्यू ओरलेंस की अत्त्रक्टिओंस की टूर देखी. हम कब्रिस्तान में गए, एक मुसयूम देखा, और नदी की किनारे पर खाना खाया. वहा अच्छा मौसम था, लेकिन एक दिन हम बहार चल रहे थे और अचानक बारिश शुरू हो गयी. हममें एक गनते के लिए बस स्टैंड के निचे खुदने पड़े. क्रिसमस के लिए शेहेर में एक बड़ा पेड़ था. उस पर सारी सजावट थी, और पेड़ बहुत सुन्दर लगती थी. ऊपर एह मशीन गलत बर्फ भी बना रहा था. वहा पे हमने बहुत सारे फोटो लिए.

एक हफ्ते के बाद हम वापिस मिचिगन लोटे. फिर घर पर और आराम किया. मैं अपनी बहन के साथ एक दिन हमारे माता-पिता के लिए खाना बनाया. हम ने हरी मिर्च में चावल भरा और सेंका. मज़ा आया, और खाना भी अच्छा लगा! नए साल के लिए मैं ने कुछ ख़ास नहीं किया, रात में घर पर एक फिल्म देकी. सुबह में मेरा परिवार के साथ मंदिर गए, और हम ने पूजा की.

बाद में मैं अपनी दोस्तों के साथ इओवा गयी. वहा हम ने लिओन किंग का शो देखा. मुझे ये शो बहुत पसंद है. लेकिन हम गाड़ी लेकर गए, और बहुत लम्बी सेर थी. अब मैं वापस कॉलेज आ गयी हूँ, और अपने कक्षे के लिए तैयार हूँ.

मेरी सुर्दी कि छुट्टिया

मैं अपनी सुर्दी की छुट्टिया में घर को गया । दिसम्बर २२ पर मैं एयर-प्लेन पर फ्लाईट लिया । मेरा घर पेन्सिलवैनिया में हैं, पूर्वी तट के निकट । मेरा पहला दिन मैं अपना परिवार के साथ एक उच्छा रेस्तरां को गया । इस रेस्तरां में बहुत क्रिसमस रोशनी था और एक क्रिसमस पेड़ था । हमारा खाना-वाला कृपालु था और हमे उपने खाना जल्दी से दी । मैं कक्षाए के दोरान बहुत नहीं सोता हूँ , इस लिए मैं अपना छुट्टिया के दोरान हर रात मैं बहुत सोया, आठ या नौ घंटे । मैं दिसम्बर २४ पर मेरा परिवार के साथ माल को गया और कुछ फोटोस लिया और कुछ दुकान में ख़रीदा । क्रिसमस के लिया मेरे माता-पिता ने मुझे एक उच्छा काट दिया और मेरी छोटी बहन ने मुझे एक फोटो-फ्रेम दी । मैंने मेरी बहन को एक "Go Blue" कमीज़ और एक विडियो-गेम दिया । मैं यह कमीज़ Ulrich's से ख़रीदा, उनिवेर्सित्य ऑफ़ मिचिगन का काम्पुस पर । मैं अपने दोस्तो के साथ कुछ फिल्मे भी देखा, "अवतार" और "ऊपर हवा में / अप इन थ एयर" । मैंने जनुअरी ४ पर मेरे दोस्तो को और मेरा परिवार को "नमस्ते" बोला, और मैं जनुअरी ५ पर मिचिगन आया ।
मेरा दिसम्बर अवकाश बहुत अच्छा रहा. मै अपनी परीक्षा के बाद, अपना घर ओहियो में गयी. वहा, मैने अपने दोस्तों और परिवार से मिली.
मेरी माँ ने बहुत बढ़िया खाना पकाया. मैने कुछ सर्दी की कपडे ख़रीदे.

२४ दिसम्बर को, मै, अपने पिता, और अपनी बहन के साथ भारत गए. हम घर से सवेरे चले. २५ दिसम्बर को, क्रिसमस के दिन, हम भारत में पहुचे.
मेरे चाचा हवाई अड्डा में हम से मिले. हम सब मेरे पिता के भाई का घर ग्रेअटर कलश में गए. हम मेरे चाचा के साथ दिल्ली में कुछ रेस्तौरंट्स और
दुकानो में गए. उसके बाद, मै, मेरे पिता, मेरी बहन, मेरी चची, और मेरी चची की एक सहली के साथ जयपुर देखने गए. हम सब एक गाड़ी में गए.
वहा, हमने हवा महल, नहार्घ फोर्ट, और कुछ सुन्दर मंदिर देखे. जयपुर मै हमने बहुत शौपिंग भी की: मैने चुडिया, कपडे, और मिठाई खरीदी. तीन दि
न की जयपुर की यत्र के बाद, हम दिल्ली वापस आये. हमने लाजपत नगर और ग्रेअटर कलश के बाज़ार में शौपिंग की. बहुत रेस्तौरांत मै खाना
खाया. हम सब मेरे पिता के परिवार से मिले. हमने महात्मा गाँधी का कब्र भी देखा.

२ जनवरी को हम भारत से रावण हुए, लेकिन दिल्ली में बहुत घुन्घ हुआ. २५० हवाई जहाज़ के फ़्लैट मंसूख किये! एयर इंडिया ने हम को अशोक
होटल लिये; होटल बहुत सुन्दर था लेकिन हमको घर जाना चाते थे. तीन दिन के बाद, हम घर पहुचे. लेकिन, हमारा सामान देर से पहुंचा! मेरा
अवकाश अच्छा था, और मुझे खुश हुई की मैने हिंदी बोलना अभ्यास किया!