Wednesday, 31 March 2010

Tuesday, 30 March 2010

मेरा पसंदीदा स्मारक

मुझे पता है कि हर कोई यह देखा गया है, लेकिन मेरा पसंदीदा भारतीय स्मारक ताजमहल है। सत्रहवाँ सदी में, राजा शाहजहां तबाह हो गया था जब उसकी तीसरी पत्नी मुमताज महल, मर गया। मुमताज मृत्यु हो गई, जबकि वह अपने जन्म के चौदहवें बच्चे को दे रही थी। रजा की दुखी के कारण, उसने अपने सर्वन्ट्स से ताज महल बनवाई थी। ताज महल मुगल वास्तुकला का एक सबसे सुंदर उदाहरण है। ताज के केंद्र में है मुमताज की कब्र है। उसकी मौत के बाद राजा अगले मुमताज दफनाया गया थाताज बागानों से घिरा हुआ है, और वहाँ पानी है कि धूप में ताजमहल का पूल प्रतिबिंबित कर रहे हैं।

मैंने ताज देखी क्रिस्त्मस छुट्टी में।
मैं भारत में मेरे पिताजी के परिवार को अपने चचेरी बहन की शादी के आदर के लिए और मेरे पिता के चचेरे भाई सोचा कि अच्छा विचार हो ताजमहल देखनी। इसलिए मैं और मेरा परिवार ताज महल गए। वहां जाने में छे घुनते लगें! मेरे पिता के चचेरा भाई का घुर ताज से दूर नहीं है लेकिन ट्राफिक के कारण हमारा बहुत समय
बरबाद किया था। जब हम अंत में वहां पहुंचें, हमें बहुत थके थे। इसलिए हम ने खाना खाए और होटल में सोये, और हमने सुलझाया कि हम ताज सुबह में देखेंगे अगर हम जाना चाहते हों।

अगले उषे में हम गए। ताज महल बहुत सुन्दर लगती थी! मुझे रोकना चाहिए थे ताज देखने के लिए। मेरे डैड जी मुझसे कहा कि कोई प्यार सच्चा नहीं जब तक ताज उसको देखा गया है। सोचती हूँ कि यह बहुत सुन्दर विचार है। ताज प्यार के नाम पुर बनायीं गयी थी।
ताज की बाहरी सजावट शानदार है! इसे हर इंच विस्तृत डिजाइनों में शामिल है. ऑप्टिकल भ्रम बनाने के लिए, आप करना चाहिए डिजाइन पाने के बड़े उच्च अप तुम जाओ. अगर डिजाइन पूरे ताज को एक ही आकार था, तो सिर्फ छोटे डिजाइन मिल जाएगा और छोटे जब तक यह गायब हो गया.

मेरा पसंदीदा भारतीय त्यौहार

मेरी पसंदीदा त्यौहार गणेशा, शिवा और पार्वती का बेटा, चतुर्थी है। यह गणेशा का जन्मदिन का धूमधाम है। शरू किया जाता है बिटवीन अगस्त २० और सप्तम्बर १५, और दस दिनों के लिए मनाया जाएगा। गणेशा बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य की सर्वोच्च देवता के रूप में पूजा जाता है। यह महाराष्ट्र, गोवा, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में सबसे अधिक व्यापक है, लेकिन यह त्यौहार भारत भर में मनाया जाता है। एक जीवन की तरह भगवान गणेश की मिट्टी पारंपरिक मॉडल दो से तीन महीने की छुट्टी से पहले बना है। तो इस मॉडल पूजा करने के लिए लोगों के घरों में रखा गया है. प्रनाप्रतिश्ह्था तो श्होदाशोपचारा पुजारी के द्वारा किया जाता है। कहा जाता है कि ये संस्कार गणेशा के लिए जीवन देनेवाले हें और भगवान को श्रद्धांजलि देते हैं। गणेश उत्सव मना के दस दिनों के बाद, छवियाँ उससे लिया जाता है सड़क पे। लोगों को गाना और नृत्य के रूप में वे नदी गणेश की छवि लेने के लिए उसे कैलाश में अपने निवास पर वापस भेजें. उसके जाने के भी उसे आदमी की बदकिस्मती से मुक्त माना जाता है. तो हर कोई अंतिम जुलूस में भाग लेता है वे प्रार्थना करते हैं कि गणेश अगले साल जल्दी वापसी करेंगे जिसमें.

Tuesday, 23 March 2010

गाँधी के बारे में due 2/22/10

गाँधी
मोहनदास करमचंद गाँधी दो आक्टूबर १९४८ जन्म हुआ. उसका नाम महात्मा भी है. गाँधी अंधेर नहीं के साथ चाहता था कि दुनिया ठीक करे. वह चाहता था कि भारत अपना अनाधीनता पाए. गाँधी हमेशा खराई देता था. गाँधी हिंदू था और अहिम्सा पीछे करता था.
वह शाकाहारी था और बहुत अपना तत्वविचार शाकाहारवाद के बारे में है. गाँधी ब्रह्मचर्य के बारे में भी बात करता था. गाँधी कहा कि वह सब पंथ पीछे करता था. वह सोचता था कि सब पंथ में अच्छी चीज़ें हैं. बहुत लोगों को उस पसंद है क्योंकि वह बहुत अच्छा आदमी था.

Monday, 22 March 2010

जेकब महंदी के बारे में

महंदी के बारे में
महंदी एक दिन शादी के पहले है. भारत में महंदी शुरू की. दुल्हन की परिवार एक दिन शादी के पहले दुल्हन के घर में महंदी करती हैं. एक पेशेवर महंदीवाली करती है, या दुल्हन की माता करती है. वह बहुत सुंदर योजनाएँ लिखती है. योजना में दुल्हा का नाम है.
दुल्हे को शादी के बाद अपना नाम खोज कर चाहीए. महंदी के बाद दुल्हन अपना घर से नहीं छुट कर सकती है. महंदी आधिक काली है, आधिक प्यार शादी में होगा. अब, महंदी अनंद के लिए भी है, और बहुत लोग कि दुल्हनें नहीं हैं प्रयोग करते है.

शादी कि तिलक रसम

भारत में बहुत रसम होते हेँ शादी के समय। एक रसम जो हर शादी में होती हेँ भारत में हेँ तिलक की रसम। यह रसम एक महीने या एक, दो हफ्ते शादी से पहले होती हेँ। यह रसम किया जाता हेँ शुभ के कारण से। इस रसम में, जो दूल्हा होता हेँ, उसके माथे पर तिलक लगते हेँ। जो दुल्हन हेँ, उसके परिवार से सब आदमीयों यह तिलक दूल्हा पर लगते हेँ। तब दुल्हन की परिवार प्रदान देती हें दूल्हा का परीवार को। इसका कारण हेँ की दूल्हा का परिवार दुल्हन को आच्छे से रखे

एक और रसम जो होता हेँ शादी के बाद हेँ द्वार रोकी रसम। इस रसम में जब
दुल्हन पहली बार आती हेँ दूल्हा का परिवार ke घर में, उसको आपना पैर मिट्टी की बरतन से गिराना होता हेँ। यह मिट्टी की बरतन घर का दरवाजा के पास रखा होता हेँ। इस रसम का वजा हेँ की कोई बुरा चीज़ नहीं हो दूल्हा और दुल्हन को। इस रसम के बाद दुल्हन घर के अंदर आ सकती हेँ।

भारत की शादी

भारत की शादी के रस्म अलग स्टेट में अलग-अलग हैंगुजरात में एक दिलचस्प रस्म "जूता चुराई" हैजब दुलहा मंडप पर आता है, ताब यह खेल शुरू होता है दुलहा जूते निकलता है, और दुलह और दुलहा के रिश्तेदारों जूते लेने चाहते हैंअगर दुल्हा के रिश्तेदारों जूते पहले ले, तो वे जूते को छिप कीशादी के दौरान दुल्हन के रिश्तेदारों जूते के लिए तलाश करता हैंकभी कभी रिश्तेदारों जूते के लिए लड़ाई शुरू करते हैं, लेकिन वे छोटे समय पर झगड़ते हैं और और कोई भी चोट नहीं लग जाती हैंअगर दुल्हन के रिश्तेदारों जूते मिल जाये, तो वे मंडप पर आये और दुल्हा मंडप से नहीं जाना पाए जब तक वह कुछ पैसे या दुसरी इनाम देते हैंइस खेल से बहुत मज़ा आते है, बच्चे के लिए और प्रौढ़ भी के लिए
एक दुसरी रस्म है की हर शादी गाना और नाचना हमेशा हैं । अक्सर एक अच्छा "गीत वाला" - "दी.जय" है, और वह अच्छे गाने लाता है, और सब लोग नाचना की फर्श पर बहुत नाचते हैंमैं कुछ गुजुरती की शादी को गुया, और गुजराती शादी में बहुत रास-गरबा हैअगर लोग नाचने चाहते हैं, तो वे लोग डंडियों लें, और नाचना की फर्श पर गरबा करेंहिन्दुस्तानी की शादियों बहुत मज़ा हैं , सब लोग के लिए

शादियों कि फेरा

एक रिवाज जो हिंदू शादियों में हमेशा होते है यह फेरा. हर हिंदू शादी में कम से कम चार फेरे होते है. इन फेरो जीवन के चार मुख्य बताते है. ये धर्म, अर्थ, कम और मोक्ष है. लेकिन भारत में यह रिवाज भी अलग अलग तरीके से करता है. गुजराती और सिंधी शादियों में अगनी का चार फेरे लेते है, लेकिन ज्यादा भारतीय संस्कृति में सात फेरे लेते है. फेरो से पहले, दुल्हन दूल्हे के दाईं तरफ बैठी है, लेकिन फेरे के बाद, वह उसका बाईं तरफ बैठी है, यह बताता है कि अब पत्नी अपना पति के दिल के पास आ गयी है. जब शादी में जोड़े सात फेरे लेते है, तब दूल्हे पहेले चार फेरे में आगे जाता है. इस के बाद, जो पिछले तीन फेरे में दुल्हे दुल्हन के पीछे चलता है. इस रिवाज से कहे जाते है कि पत्नी हमेशा पति का रास्ता बताएंगे. गुजराती शादी में यह ही आर्थ है, लेकिन दूल्हे पहले तीन फेरे में आगे जाता है, और दुल्हन चौथे में आगे जाती है। जब फेरे ख़तम हो जाये, तब कहे जा सकते कि वे पति-पत्नी है।

shaadi

बंगाली शादी के रिवाज़ में, शादी से एक दिन पहले "शारीर की हल्दी" होता है. दोनों मुसलमन और हिन्दू लोग यह वाज़ अभ्यास करते है. "शारीर की हल्दी" में, बरात (दूल्हा के बिना) दुल्हन का घर जाते हैं और उसके साथ शादी की साडी, हल्दी पेस्ट, और मेहँदी लाते हैं. बारात भी मछली लाते हैं -- एक मछली दुल्हन है और दूसरा दूल्हा है. ये मछलियां उचल या मिठाइयाँ होता हैं. इस रिवाज़ में, दुल्हन की सहेलियां ख़ास हैं और वे लाल, पिला, या हरारंग कपड़े पेहेनते हैं. अवसर के बाद, सब लोग बड़ा दावत खाते हैं जो दुल्हन की परिवार आयोजन करते हैं. 


इसके दौरान, दुल्हन के हाथों पर मेंहदी की नमूने होता है. मेंहदी की नमूने बहुत कठिन हैं.  दुल्हन की सहेलियां उसकी हाथों और पेड़ों पर हल्दी लगाती हैं. लोग कहते हैं कि हल्दी लगाने के बाद, दुल्हन और सुन्दर लगते है उसकी शादी के लिए. लोगों दुल्हन को मिठाइयाँ खिलते है. दुल्हन कि "शारीर कि होलुद" के बाद, दूल्हा का "शारीर कि होलुद" होता हैं. दुल्हन का परिवार दूल्हा के साथ समय बिताते हैं और उसके हाथों और पेड़ों पर भी हल्दी लगते है. मुझे यह रिवाज़ बहुत पसंद है क्योंकि धर्मनिष्ठता ख़ास नहीं है. " बंगाल और बंगलादेश मैं लोग "शारीर कि हल्दी" अभ्यास करते हैं. 
- नीना 

गुजरती शादी से मेहँदी

गुजराती शादी से दो दिन पहले मेहँदी की रात है. दुल्हन की बहेन मेहँदी की योजना करे और मेहँदी पार्टी भी उसका घर में है. मेहँदी पार्टी में पहले दुल्हन की परिवार आये और पूजा रखे. पूजा के बाद एक संगीतकार गीत गाये और एक मेहँदी कलाकार दुल्हन की मेहँदी शुरू करे. उसके बाद दूल्हा का परिवार आये और दुल्हन की परिवार उसको दरवाज़ा पर मिलने जाइए. इस समय के दोअरान में मेहँदी कलाकार दुल्हन को सलाह देती है. दूल्हा का परिवार मिलने के बाद दूल्हा दुल्हन के पास बेठे और दुल्हन को खाने देते है. इस समय पर सब लोग खाने खाते है और दुल्हन और दूल्हा का परिवार में नाने बच्चे नाचते है. खाने के बाद सब औरत कतार में रहते है और पांच, छे मेहँदी कलाकार मेहँदी लगाते है. पुरानी विश्वास कहते है कि मेहँदी पार्टी के बाद जब तक शादी के दिन दुल्हन घर से नहीं निकल सकती. विश्वास भी कहते है कि जब दुल्हन कि मेहँदी हाथ पर रहते, तब दूल्हा का घर में कोई काम नै कर सकती.

शादी - चिराग खेर

भारती शादिया में बहुत सारे रस्मे होते हैं। गुजराती शादियों में बहुत मज़ा आता हैं। गुजराती शादी में खूब समय चाहिए। कम से कम तिन दिन तो ज़रूरी चाहिए। जब मैं ग्यारह साल का था, मैं भारत गया था। एक महीने में हम तिन शादिया में गए थे। मेरे चचेरे भाई, और दो फुफेरी बहन की शादियाँ थी। मुझे बहुत कुछ ख़ास बाते और रसमें याद नहीं हैं लेकिन मुझे याद हैं की बहुत खुश था और बहुत मज़ा आया था। गुजराती शादियाँ बहुत लम्बी होती हैं क्योंकि बहुत रस्मे होते हैं। एक दिन सब मामा के परिवार से आते हैं और दूल्हा या दुल्हन को भेंट और आशीर्वाद देते हैं। फिर दुसरे दिन पर सब औरते माता जी के मंदिर मैं जाते हैं और वहा एक पूजा करते हैं। उस रात पर गाव में एक बड़ी बरात जेसा रखते हैं। तब दूल्हा को घोडा पर सारा गाव में घुमाते हैं। वोह प्रसेशन में नाच गाना होता हैं और धमाके होते हैं। फिर तीसरा दिन पर शादी होती हैं। तब दूल्हा के सब बरात में आते हैं। बहुत सारा नाच गाना और धमाके भी होते हैं। बरात ख़त्म होने के बाद, शादी शुरू होती हैं। शादी मैं दो-तिन घंटे और लगते हैं। हमारे धर्म की विधि थोड़ी और लम्बी हैं। शादी ख़त्म होकर विदाई होती हैं। तब दूल्हा दुल्हन को उसके घर ले जाता हैं.

शादी कि रसम

हिन्दू शादी में बहुत सरे अलग अलग तरीके के है। एक रसम जो मेरा परिवार करता है जूता चुराना का खेल। इस में दोनों दूल्हा और दुल्हन के परिवार और दोस्त एक दुसरे के सात खेलते है। यह शादी के पहले शुरू होता है। जब दुल्हन मुन्द्प पर जथा है वह अपने जूते निकालते है। उसके बाद दोनों रिश्तेदारों जूता चुराने क़ी कोशिश करते है। जब वहा जूते चुराते है। उनको जूते फिर छुपाना पदता है। फिर थोड़े वक्त के बाद जो भी परिवार ने जूते नहीं छुपाये उनको जूते दुन्दना पड़ता है। फिर वह थोड़ी देर के लिए दुन्दते है। बहुत मज़ा आता है और कभी कभी लोग को चोट लगती है। जो भी परिवार के पास जूते है उनको दुसरे परिवार से पैसा मिलता है। यह खेल का नाम जूता छुपाई है।

दूसरा रसम सप्तपदी एक रसम है जो शादी में होता है। दुल्हन और दूल्हा सात चक्र में चलते है। दोनों हवन के चक्रे में चलते है। हर चक्र का अलग अलग मतलब होता है। पहले छे चक्रे धुलान आगे चलती है और आखरी चक्र दूल्हा आगे चलता है। जब वह सारे चक्रे ख़तम करते है तुब वह एक शादी शुदा कपुल बुन जाते है।

शादी की रसम

मेरी परिवार में बहुत अलग-अलग शादी की रसम है. हमारा परिवार में, महिलाओ सिर्फ गीत गाते है. शादी की हर दिन, और दिन का हर रसम, सब गाते है. मुझे गीत की समाज नहीं आता है, इसलिए में बहुत ऊब बनता हूँ. और सिर्फ महिलाओ गाते है, सब आदमियो एक दूसरी कमरे और बहार रहते है. जब समय आते है की वे कुछ करने की जरुरत है, तब जल्दी से करते है, और वापस बहार जाहते है. मुझे हमारी शादी की बहुत मालूम नहीं, लेकिन हम थोड़े आम रसम करते है. मंडप पर शादी हिन्दू शादी के साथ एक लगते है. शादी की दिन में दूल्हा और दुल्हन की रिश्तेदारों जूते की खेल खेलते है. इस पिछले ठण्ड की अवकाश, में और मेरी माँ मेरी मौसी की बेटी की शादी में गए, और में बहुत जागरूकता से सब देखा. हम ममेरू करते है, जब दुल्हन की माँ की भाइयो और अपने परिवारों आते है, और कुछ पूजा करते है. और में पहेली बार में संगीत संध्या और महेंदी रसम में गया. मेरी चचेरी बहन की शादी बहुत जल्दी से किया, क्योंकि बहुत आदमियों अमेरिका से आये थे, और हमारा अवकाश बहुत लम्बे नहीं है. में और मेरी माँ शादी की रसम के बाद घर गए, लेकिन मुझे लगता है की अगले दिन में दूल्हा ने छोड़ दिया था, और सब लोग बहुत रोये थे.

भारतीय शादी के बारे में: संगीत

संगीत में, बहुत गीत और नाच हैं। संगीत मेहँदी के बाद होता है। यह पार्टी कभी कभी सारा रात जा रहा है। अक्सर, संगीत दुलहन के घर पर हूआ। दुलहन के घर पर सुन्दर दीप और फूल लगते है। सारा लोग संगीत के लिए उत्सुक हैं, और लोग आते हैं रात सात बजे और वे नाचते, खाते, और गीत गाते सारा रात के लिए। आज कल, दोनों आदमी और औरते संगीत में समारोह करते हैं, लेकिन पुराने दिन में, सिर्फ औरते आती थीं। दुल्हा के घर में, औरते मेल करती हैं और यही गीत गाती हैं।

सब गीत और नाच एक "थीम" के बारे में। यह "थीम" है आदमी और औरत का प्यार कैसी होता है। बहुधा, संगीत पुनजब और गुजुरत में होता है। गुजुरती लोग गरबा करते हैं।

मैं एक संगीत को गयी छे साल पहले। हॉल में, एक रंगमंच था। मेरी बहन ने एक "एल्विस" का गीत गाया और मैंने एक लेहेंगा पहना और मेरी माँ ने साडी पहना। और मैंने मेरी बहन के साथ एक नाच किया। यह संगीत बहुत मजेदार था- मेरा गंभीर चाचा और पिता जी भी नाचे थे। संगीत में, कोई तरह के खाना था: बात, पनीर, दाल, पूरी, साग, और तन्दूरी चूजा भी था। रसगुल्ले और "केक" भी था.

शादी के रिवाज

बहुत भारतीय शादी के रिवाज हैं संगीत संध्या एक मजेदार रिवाज हैवह रिवाज उत्तरी भारत में सामान्य है उस रिवाज में बहुत लोक संगीत और नाच हैदोनों परिवार साथ साथ नाच करके गाते हैं। वे ढोलकी बजाते हैंढोलकी एक छोटा ड्रम हैदुल्हन और दूल्हा अपने परिवार परिचय कराते हैं।
मेंहदी उत्सव दूसरा मजेदार शादी का रिवाज है। अक्सर दुल्हन का परिवार ही वह रिवाज उत्सव मनाता है और वह शादी के बाद कुछ दिन ही होता है। उस रिवाज में लोग अपने हाथ और पैर पर लाल-भूरा रंग पाते हैं। मेंहदी का डिज़ाइन बहुत "डिटेल्ड" है। कभी-कभी लोग डिज़ाइन में दूल्हा का नाम लिखता है। वह रिवाज में भी औरत नाच करके गाती हैं। वे रंग-रंगीली ड्रेस पहनती हैं।
तीसरा रिवाज बरात निकासी है वह दूल्हा की निकासी शादी के जगह को है। दूल्हा अपने परिवार और दोस्त से घोड़े या हाथी पर चलाता है। बरात रंग-रंगीला और भव्य है। दूल्हा ट्रडिशनल कपड़ा पहनता है। कुछ दूल्हे फूल से पगड़ी पहनता है। फूल उसके चेहरे पर हैंरिश्तेदार उसके माथे पर तिलक पाते हैं। लोग नाच करके ड्रम बजाते हैं जब दूल्हा पहुंचता है तब कोई स्वागत-गाना बजाता है। वह दरवाजे पर दस्तक देकर इमारत में जाता है

Sunday, 21 March 2010

शादी की रसम- सतिश मोहन

भारतीय शादियों में बहुत सी रिवाजे हैं. दोनो परिवारों को यह बहुत खास समय है. निमंत्रण बेचने से डोली होने तक छोटी छोटी रसम है. शादी की तेयार करने के लिए पूरा परिवार मदद करेगा क्योंकि सिर्फ एक आदमी नहीं कर पायेगा. पहले निमंत्रण को अच्छा नमूना चाहिए क्योंकि सभी लोग यह देखेंगे. अक्सर, पिता या भाई निमंत्रण की चीज़ें कर चुकेगा. फिर, सब शादियों में मेहँदी ज़रूर होगी. इस समय में बहुत औरते आयेंगे और हाथों में मेहेंदिवाली मेहँदी लगाती है. कोई गाती है और दुसरे नाचती है. सभी लोग खुशी है.

भारत का हर अनुभाग में अलग अलग रसम है क्योंकि हर स्थान में उस की संस्कृति से रसम आया जाती है. तमिल नाडू में, शादी बहुत समय होगी. हर दिन सुबह सुबह लोग उठाएंगे. बहुत सी पूजा है, लेकिन खाना भी है. शादी सिर्फ रसम नहीं, यह बहुत आद्यात्मिक समय भी है. शादी के बाद, तमिल शादियों में हमेशा बहुत अच्छा खाना खाया जाएगी. सभी लोग बहुत ज्यादा खायेंगे और घर जाकर, सोयेंगे. शादी का खाना बहुत ज़रूरी है. अगर खाना अच्छा नहीं है, तो लोग कहेंगे की शादी बुरा है.

शादी - रौनक

शादियों में बहुत सारा रस्म है| बारात में दूल्हा का घर से दुल्हन का घर तक गोदा प्रसंग है| दुल्हन का परिवार दूल्हा का परिवार को मंदिर में स्वागतम करते है| फिर दुल्हन की माँ दूल्हा का परिवार अपनी परिवार में परिवार में आमंत्रण देते हैं| दुल्हन की माँ दुल्हन का माथा पर तीलक डालते है| गुजराती शादियों में शादी का एक दिन पहले संगीत संध्या का कार्यक्रम होती है| उस रात पर दुल्हन की परिवार गाने और नाचने का संपादन रकते है| संगीत संध्या का एक दिन पहले दूल्हा का परिवार गरबा और रास का संपादन रकते है| गुजराती लोग ही रास और गरबा रकते है| डंडिया रास में पार्टनर के साथ डंडिया मरते है और गरबा चक्कर में नाच करते है| लड़कियों चान्य चोली पहेंते है और लड़के धोती पहेंठे है| कपडे हमेशा बहुत रंगीन है| हर रात बहुत अच्छे खाने होते है, और शादी में खाना बहुत अत्यावश्यक है| एक और रस्म है जेसे नाम है फेरी| शादी के बाद दूल्हा और दुल्हन दूल्हान की घर वापस जाते है| दूल्हा दुल्हन की परिवार को मिलते है| शादी के बाद दूल्हा दुल्हन की घर नहीं जा सकते इसीलिए पहले बार सभी परिवार को मिलते है| हिन्दू शादियों में बहुत मज़ा आती है|

भारती शादी

भारती शादी में बहुत रंग होते है. सब रिश्तेदार दूर से आते है और सब दोस्तों भी आते है. सब लोग बहुत नाचते और गाठे है जिस के वाजे से बहुत मज़ा आता है. शादी दिनों के लिए चलती है और उस दिनों में सब लोग रसम और रिवाज़ में शामिल होते है. पहेले बारात आती है दूल्हा लेकर. इस में दुल्हा के रिश्तेदार नाचते और गाठे हैं डोली बजकर और दुल्हा उनके पीछे रहेता है घोड़े पर बेटकर. एक खेल के नाम है जूते चुराना इस में सब लड़की वाले दुल्हा के जूते चुराते है और पैसे मंग्ठे है. फिर शादी होती है यह बहुत लम्बी है और फेरे के रसम इसमें होती है. फेरे के बाढ और कुछ खेल होते है जैसे अंगूठा दूध में धुन्दना वैसे तहरा के खेल. फिर ढोली आती है और दुल्हन को ले जाती है यह बहुत अफ़सोस और ख़ुशी की बात है कयोंकी दुल्हन घर छोड़ रही है लेकिन वह आपने मईके के पास जा रही है. शादी बहुत खूबसुरत होती है और धूम धमाल से मना जाता है.

गुजराती शादी - शादी से पहले

एक गुजराती शादी में बहुत कुछ होता है। शादी से पहले भी बहुत होता है। सगाई, मंडप महूरत, गृह शांति, पीठी, मेहँदी, और गरबा होते है। सब महमान ये सब पर नहीं आते है और इन सब की निमंत्रण अलग अलग हैं।

सगाई पर सारे महमान आते है। बहुत बार, सगाई लड़का का घर में होता है। लड़की का परिवार मिठाइयाँ और भेंट लेकर आता है। लड़का और लड़की के महमान सगाई पर आते हैं।

मंडप महूरत में गणेश पूजा होता है। दोनों लड़की और लड़का के घर में अलग-अलग से होता है। गणेश एक "remover of obstacles" है और इस पूजा होता है इस लिए क्योंकि लड़का और लड़की चाहते हैं की शादी में कुछ समस्या न हो।

गृह शान्ति एक और पूजा है, लेकिन इस में, दोनों, लड़की और लड़का आते हैं। पंडित-जी एक शुभ दिन पर पूजा करता है।

पीठी लड़का और लड़की का घर में अलग-अलग से होता है। पीठी में लड़की और लड़की हल्दी का पेस्ट में नहाते हैं।

महंदी लड़की की विधि है। लड़की के हाथों पर कुछ लोग महंदी लगाता है। यह शादी से एक-दो दिन पहले होता है।

गुजरती लोग गरबा भी करते हैं। शादी से एक दिन पहले होता है। इस में, लड़का और लड़की का सब महमान आते हैं। सब नाचते है और शादी के लिए तैयार होते हैं।

गुजराती शादी बहुत मजेदार होते हैं।

भारत की शादी

भारत की शादी में मेंधी का दिन है। मेहँदी लडकिया सिर्फ के लिए है। बहुत परिवार आये और मेहँदी हाथ पर लगाये। दुलहन हाथ पर ज्यादा मेहँदी लगाये। और हाथ भी दुल्हा का नाम लिखता है। मेहँदी पार्टी पर नाच भी करते हैँ। मेरी चचेरी बहन की शादी पर मेरी बहन और मैं पाच नाच किये। और मेरे माथा-पिता गायन गाये। मेहँदी पार्टी पर बहुत खाना हैँ। मशहूर खाना पानी पूरी, चाट पूरी, समोसा, डोसा, इडली, और चिली पनीर हैँ। मैं मेहँदी लगाना नहीं पसंद हैँ क्योंकि बहुत अश्लील हैँ जब मैं सू रही हूँ।
एक भी शादी की कार्यक्रम गरबा हैँ। गरबा शादी की एक दिन पहला हैँ। गरबा रात को हैँ और परिवार और परिवार का दोस्त उक्सआते हैँ। गरबा पर खबी-खबी नाच हैँ। जब मेरी चचेरी बहन शादी किया मैं और मेरी बहन एक नाच किया गरबा में। गरबा पर लडकिया चान्य-चोली पहनता हैँ और लडके जभो लहंगो पहनता हैँपरिमंडल में भगवान् हैँ और लोग मँडराते हैँ।
संगीत पंजाबी शादी में हैँ। संगीत पर गाना गाते हैँ और ढोलकी बजाते हैँ। संगीत दुलहन का परिवार आयोजन करता हैँ और दुल्हा का परिवार सिर्फ उक्सआता हैँ। संगीत पर सब लोग नाचते हैँ और गाते हैँ। खाना भी हैँ और पंजाबी खाना हैँ। मेरी चचेरी बहन हिंदी-पंजाबी लड़का के साथ शादी किया और उसकी शादी गुजुराती-पंजाबी था। शादी में संगीत था और गरबा भी था। दो रेसेप्शुं था एक दीटृईट में और टोरोंटो में।




शादी का नीयुम

मेरा नाम दर्पित है और मैं गुजराती हूँ। हमारी शादी कई परंपराओं है। हमारी एक परंपराओं रास है। रास को लिया आप संगीत और दो लाठी ज़रूरत है। रास शामिल अपना साथी की लाठी थोकर संगीता के साथ। रास एक दिन के पहला शादी से है। एक और परंपरा हम मेहंदी की रस्म है। महिलाओं उसका हाथों और पैरों पर मैं महंदी डाल दिया। महंदी की रस्म भी एक दिन के पहला शादी से है । पिछले प्रमुख परंपरा हम स्वागत है। स्वागत हमाश शादी के रत मैं है। स्वागत हमेशा बहुत मज़ा आता है। वहाँ बहुत भोजन और नृत्य है। मारी मसि का शादी मे मैं बहुत खाना कह्य था और बहुत नाच क्या। मारा शादी में मैं तीन सब परंपराओं रक् क्रअंगे। मेरे पसंदीदा परंपरा रास है। मैं रास कर गया है जब से मैं बहुत छोटा था। मैं अपने स्कूल में रास टीम पर था। मुझे आशा है कि अपने बच्चों के रूप में भी रास प्यार जितना है। उन मुख्य गुजरात की शादी की परंपरा है।

Sangeet

हिन्दुस्तानी शादियों में संगीत का एक विशेष स्थान है. बहू का परिवार संगीत का आयोजन करता है. संगीत रात के दौरान है, मेहँदी और शादी से दो दिन पहले. संगीत एक बहुत ख़ुशी समय है: लोग खाना खाते हैं और नाचते हैं. परंपरागत रूप से सिर्फ बहु के परिवार के लोग ही संगीत आते थे, लेकिन आजकल दोनों बहु और साईस के परिवार के लोग संगीत आते हैं. प्रथानुसार सिर्फ औरते संगीत आती थी, लेकिन आजकल दोनों औरते और कुछ आदमी भी संगीत आते हैं.

संगीत में लोग ढोलकी बजाते हैं और संगीत गाते हैं. सब लोग नाचते हैं. बहु के परिवार के लोग साईस के परिवार को चिढ़ते हैं. संगीत के दौरान बहु और अपने माँ और पिता उदास हैं, क्योकि बहु उनके घर से विदा होगी. परिवार भगवान को विवाह के लिए शुक्रिया करते है. संगीत में, गरबा और डांडिया रास नाच जनरंजक हैं. कभी-कभी कुछ रिश्तेदार एक नाच तैयार करते हैं.

गाने और नाचने के बाद लोग खाना खाते हैं. अक्सर मिठाइया और जलपान भी परोसे जाते हैं. पंजाबी और गुजराती संगीत का आयोजन करते हैं, दक्षिण भारतीय नहीं. कभी-कभी, लोग संगीत और मेहँदी एकसाथ मनाते हैं (क्योकि ये अनुष्ठान बहुत महंगे हैं).

भारत की शादी

भारत में शादी के रस्म और रिवाज बहुत अलग अलग हैं। हर स्टेट में एक अलग तरह से शादी होती है। भारत में कई धर्म के लोग रहते हैं। इसलिए शादी भी उनके धर्म के मुताबिक होती है। कुछ चीज़ है जो वहन के हर धर्म के लोग करते है। जैसे कि शादी की पार्टी। हिन्दू धर्म में शादी में लड़के वाले बरात लेकर आतें। खूब गाना बजाना होता है। लड़की के घर पर या हॉल में शादी के सात फेरे लिए जाते है। पंडित कराते है। शादी के रस्में रत भर चलती हैं। दुसरे दिन दूल्हा दुल्हन को अपने घर ले आता है। मुस्लमान धर्म में भी बरात आती है। लड़की के घर में या हॉल में फिर मौलवी निकाह पढ्वाते है। उसके बाद रस्में होती हैं। दुसरे दिन दुल्हन दूल्हा के साथ सुसराल चली जाती है। भारत में साडी के पहले मेहँदी की रस्म होती है। शादी के कुछ दिन पहले लड़की के घर में सभी औरते इकत होती है। गीत गाये जाते है। लड़की को लड़के वाले के यहाँ से आई हुई मेहँदी को लगाया जाता है। सारे मेहमान और घर के लोग भी मेहँदी लगाते हैं। रवाना पीना और गाना बजाना होता है। भारत में शादी का मतलब होता है साड़ी अम्र के साथ.

अमरीकन शादी और भारतीय शादी

मुझे अमरीकन शादी के बारे में बहुत ज्यादा नहीं मालुम | मैं सिर्फ एक अमरीकन शादी 'अटेंड' की | मेरी बहन की 'बोय्फ़्रिएन्द' के परिवार 'कैथोलिक' है और उन्होंने कह कि अगर दोनों शादी करें तो मेरी बहन एक 'कैथोलिक' बनना पड़ेगी | इस लिए अभी मेरी बहन और अपनी 'बोय्फ़्रिएन्द' शादी नहीं की | सो अमरीकन शादी कभी कभी आज़ादी नहीं है | कोई परिवार बहुत अनुदार हैं और अगर दोनों एक ही धुरम तो शादी नहीं कर सके | अमरीकन शादी में अक्सर नए पत्नी-पति पति के परिवार के नजदीक रहतें हैं और इस लिए भारतीय कि शादी बहुत अलग नहीं | जब मैंने सगाई के बारे में पढ़ा जब मुझे पता चल रही थी कि दुल्हन, दुल्हे के परिवार के घर जाती हैं | मुझे मेंहदी रिवाज बहुत पसंद है | क्योंकि मेंहदी रिवाज सिर्फ औरतों के लिए और बहुत जागरी रिवाज है | मुझे पुरुष प्रधान रिवाज नहीं पसंद हैं | मेंहदी रिवाज पुरुष प्रधान नहीं है |
मैंने रुखसती के बारे मैं भी पढ़ा और मुझे यह रिवाज नहीं पसंद है क्योंकि हमेशा दुल्हन अपने परिवार छोर देती हैं | मेरी लिए अपने परिवार बहुत जागरी और ख़ास हैं और इस लिए मैं सोचती हूँ कि रुखसती बहुत उदास है | मैं याद करती हूँ कि दक्षिणी भारत में कभी-कभी दूल्हा दुल्हन के परिवार के साथ रहतें हैं लेकिन आधिक समय दुल्हन अपने परिवार छोर देती है |

पंजाबी शादियाँ की रस्में

मुझे हिन्दुस्तानी शादियाँ बहुत पसंद है क्योंकि बे अनुनादी है और पूरा परिवार एक बुद्धि होते हैं। मैं अपनी ज़िन्दगी में बहुत शादियाँ गया और मुझे लगता है कि पंजाबी शादियाँ सबसे मजेदर हैं। मेरा परिवार पंजाबी हैं तो मुझे उसकी रस्म मालूम है। औरतें की संगीत एक रस्म है। यह रस्म शादी के पहले है और बहुत उत्तेजक है। पुराने समय में, यह सिर्फ औरतें के लिए थी, लेखिन अब दोनों आदमी और औरतें संगीत करते हैं। पंजाबी संगीत में, लड़कियाँ कुछ बोलियाँ गाती हैं और गिधा नाचती हैं। संगीत में, लड़के भांगड़ा नाचते हैं। यह बहुत-बहुत मनोरंजक है। संगीत का ख़ास वाद्य ढोलकी है और एक औरत एक चुमचा ढोलकी पर ताल के लिए पीटती है। यह संगीत सारी रात होती है।
बरात एक दूसरा हिन्दुस्तानी रस्म है और बहुत अनुपम है। दूल्हा शादी को घोड़े पर आते है। बहुत लोग बरात में नाचते, गाते, मुस्कराते, और हँसते हैं। यह बहुत ख़ुशी का रस्म है। दुल्हे सेहरा और साफा सिर पर पहनता है। घोड़े पर दुल्हे के आगे सर्बाला बैठा है। जब दूल्हा शादी को आता है, तब शादी का अवसर शुरू कर सकता है। जब बरात पहुँचता है, दोनों दूल्हा और दुल्हन का परिवार मिलते हैं और उपहार आदान-प्रदान करते हैं।

Saturday, 20 March 2010

हिन्दुस्तानी शादियों के परम्पराएं

हिन्दुस्तानी शादियाँ बहुत मजेदार होतीं हैं, खासकर के पंजाबी शादियाँ. लोग इन शादियों में बहुत मज़ा करतें हैं. वे नए लोगों से मिलतें हैं, एक दुसरे के साथ मस्ती करतें हैं, स्वादिष्ट खाना खातें हैं और खूब नाचते-गातें हैं. पंजाबी शादियों के बहुत सारे रस्म होतें हैं, लेकिन मेरे ख्याल से जो सबसे महत्वपूर्ण रस्म है वोह है सप्तपदी य साथ फेरे.
दूल्हा और दुल्हन यह एक डरी हुई आग के चारों ओर करतें हैं, और यह आग परमेश्वर से प्रतीकात्मक होती है.
जब दूल्हा और दुल्हन यह साथ फेरे लेतें हैं, तब पंडितजी मंत्र सुनतें हैं और शादी के महत्व की बात करतें हैं. इसी के बाद दूल्हा दुल्हन की मांग में सिन्दूर भरता है और उसे मंगलसूत्र भी पहनाता है. दोनों सिंदूर और मंगलसूत्र मजबूत धार्मिक प्रभाव है और एक शादी शुदा औरत का पवित्र प्रतीक हैं. इस रस्म के बाद दुल्हन की विदाई होती है और वह अपने पति के घर, अपने ससुराल, चली जाती है.

Friday, 19 March 2010

हिन्दुस्तानी शादी के कस्टम्स

हिन्दुस्तानी शादी बहुत ही मज़दार होती हैं। सात फेरे होने के बाद, लड़का और लड़की अलग अलग तरीके के खेल खेलते हैं। यह खेल लड़की और लड़के के परिवार वालों को साथ लाते हैं औ उन के बीच का प्यार बरते हैं। इस के इलावा यह कहल शादी को और रंगीन बन्नते हैं। एक खेल का नाम है मछली उन्गुती में। इस खेल में लड़की अपनी शादी की उन्गुती एक बर्तन में ड़ाल ती है। बर्तन में दूद या पानी होता है और उन्गुती को गुलाबो के पथों से छुपा जाता है। अगर लड़की को उन्गुती मिलती है तो इस का मतलब यह हुआ की वेह आपने सुसराल में राज करेगी। उस का पति उस का घुलाम बन के रह जाता है. अगर लड़के को उन्गुती पहले मिलती है तो पति कर को राज करता है। दुसरे खेल में लड़के के हाथ पर एक दागा बंदी जाती है। लड़की को लड़के के हाथ पर डोरी को खोलने पड़ता है। अगर लड़की दागा खोल दे ती है तो लड़का और लड़की ज़िन्दगी बार खुशाल रहते हैं। शादी के खेलों के इलावा शादी के अंत में विदाई भी होती है। विदाई में लड़की अपनी माँ और बाप को नमस्कार कहती है। वेह अपनी दोस्तों, बहन और बही से मिलती है। कभी कभी बहुत मुस्खिल हो जाता है दुल्हन को आपने ढोली में बिताना। मुझे हिन्दुस्तानी शादी बहुत ही अच्छी लगती हैं।

Thursday, 18 March 2010

जूते चुराना और संगीत प्रोग्राम

पहेल तो मैँ जूते चुराने की रस्म के बारे में बात करना चाहती हूँ। मूझे लगता हैं कि कई साल पहेल यह रस्म ज्यादा होता था, क्योंकि मैँ एस के बारे में बहुत सुनी हूँ लेकिन मैँ ने कभी देखा नहीं है। मैँ अक्सर यह रस्म फिल्मो में देखती हूँ, जैसे 'हम आप के हैं कौन', एस फिल्म में एक गाना हैं, 'जूते दो पैसे लो', जो यह रस्म के बारे में हैं। यह रस्म बहुत मज़ेदार लगता है, एस लिए मैँ चाहती हूँ कि यह रस्म मेरे शादी में हो।
संगीत प्रोग्राम एक और रस्म है जिस में बहुत मज़ा आता है और मूझे पसंद है। मैँ भारत में दो-तीन शादियाँ मैँ गयी हूँ और संगीत प्रोग्राम शादी के एक दिन पहेली होता है। और यह बहुत ही बड़ी पार्टी है तो अक्सर यह एक बड़े हॉल में होता है। प्रोग्राम में दुल्हन और दूल्हा के सरे रिश्तेदारों को बुलाते है और सब के लिए बहुत खाना मंगवाते है। दुल्हन और दूल्हा के कइ करीब रिश्तेदार कुछ तैयार करते है। जसे जब भी मैँ शादी में जाती हूँ मैँ हर बार कोई अच्छे गाने पर नाच तैयार करती हूँ और संगीत प्रोग्राम में सब के सामने करते हूँ। क्योंकि मूझे नाचने बहुत शौक है, मूझे संगीत प्रोग्राम पर बहुत मज़ा आता है।

Wednesday, 17 March 2010

कश्मीरी शादियाँ

मैं कश्मीरी शादी के बारे में लिखने क्योंकि मेरे दादा कश्मीर से है. पारंपरिक कश्मीरी शादियों में दूल्हे और दुल्हन की कुंडली मिलान कर रहे हैं. औपचारिक सगाई के पारंपरिक रूप से सबसे बड़ी ने भी देखा है दोनों दुल्हन और दूल्हे के परिवार. बड़ों को अपनी स्वीकृति और खुशी मनाने का एक संकेत के रूप में मंदिर और मुद्रा फूल में मिलते हैं. फिर, एक भोजन दुल्हन के परिवार द्वारा तैयार की हर किसी को तैयार है. फिर, आठ पूर्व शादी की रस्में शुरू: लिवून, वान्वुन, मान्ज़िरात, बरियाँ, थाल्स, पूलन का गहना, संज़रू, और देव्गों। इन अनुष्ठानों में प्रत्येक परिवार की घटनाओं की सफाई और सजाने उनके घरों सहित एक श्रृंखला के माध्यम से शादी के लिए तैयार करता है, संगीत के खेल, खाना बनाने, और अपने पड़ोसियों के साथ मना. देव्गों अनुष्ठान में, प्रत्येक परिवार के व्रत के ठीक पहले शादी शुरू होता है. दूल्हे और दुल्हन भी पानी में नहाया करते हैं, चावल, दूध, दही और फूलों की बौछार कर रहे हैं. अंत में, दिजरू, एक कान के गहने पारंपरिक रूप से एक विवाहित महिला के संकेत के रूप में कश्मीर में पहना, दुल्हन पर रखा गया है. अगले, वास्तविक शादी समारोह शुरू करते हैं. दूल्हे की सवारी दुल्हन के घर में एक घोड़े और दुल्हन के परिवार ने स्वागत किया है. परिवार की सबसे बड़ी महिला सदस्य दूल्हे और दुल्हन के लिए नाबाद फ़ीड और उनके माथे पर चुंबन चावल का एक उपहार है और गरीबों को दिया जाता है. दूल्हे और दुल्हन तो पुरोहित, जो रस्म के साथ शुरू होता है द्वारा शुरू की शादी का नेतृत्व कर रहे हैं बुलाया आठ्वास में दूल्हे और दुल्हन एक दूसरे की बाहों कीट और हाथ पकड़. फिर, दूल्हे और दुल्हन को उनकी शादी के छल्ले खींचने की कोशिश करना चाहिए, और जो कोई भी एक अंगूठी पहले पाता है, यह ने कहा कि शादी में प्रमुख व्यक्ति होगा. फिर एक सुनहरा धागा नामक एक मानन्मल दूल्हे और दुल्हन के सिर पर बाँधा है. तो दूल्हे और दुल्हन के बाएं पैर एक पत्थर पर रख दिया गया है एक कज्वत कहा जाता है, और मंत्रों के रूप में एक रुपया पत्थर पर रखा सिक्कों पर वे कदम बोले हैं. वहाँ सात सिक्के हैं सात फेरस प्रतिनिधित्व करते हैं. अब दूल्हे और दुल्हन शादी हो चुकी है, और एक दूसरे को चावल फ़ीड चाहिए. तो दुल्हन दूल्हे के साथ पत्तियों को अपने नए परिवार में शामिल हो, एक रस्म बुलाया बिदाई. जब उन्होंने दूल्हे के घर में आया, दूल्हे की सबसे बड़ी चाची को यह बताने में नववरवधू जब तक वह एक वर्तमान मना कर दिया जाता है माना जाता है. जब वे घर, कबूतरों की एक जोड़ी में स्वीकार किए जाते हैं मुक्त और मानन्मल विमर्श किया जाता है. शाम में, समारोह के बाद, शादी कुछ पत्नी के घर में वापस जाओ और अपने माता पिता के साथ रात का खाना है. परंपरागत रूप से, एक उपहार पति को दिया जब वे माता पिता के घर में आने और एक केक अपने परिवार के लिए भेज दिया जाता है.