Wednesday, 25 January 2012

औपचारीक पात्र





सेवा में
              No.15, झील 1 मेन रोड,   
नुन्गाम्बक्कम ,


चेन्नई - 600034.

१८ मार्च  २०११ 

 मान्यकर वर्मा  जी , 


मैं हिन्दी शिक्षक हूँ और मैं अखबार में आपके  विज्ञापन पढ़ी थी.  मैं अमेरिका से हूँ. मैं एक डिग्री से मिशिगन विश्वविद्यालय हूँ.  यह बच्चों की शिक्षा में है.


मैं एक स्कूल में तीन साल के लिए बच्चों के साथ काम किया हूँ. बच्चों, मेरे लिए बहुत प्यार थे. मैं उनके साथ बहुत सहनाशीलती थी. हम शब्द का खेल और जेपोर्द्य खेला थेइस ढंग से वे बहुत सीखे थे.


इस ढंग मेरे साथ लाना चाहता है.


मुझे आप अपने स्कूल में एक मांका दे. आप मुझ से बहुत खुश होंगे. मैं आपके. 

 मैं आपको अपने समय और विचार के लिए धन्यवाद.
अनेक धन्यवाद


आप  की सदभावी,


मौनिका रासमुसेन

Monday, 23 January 2012

Qutb Minar

अगर मैं भारत जाऊं तो मैं कुतब मीनार देखने चाहती हूँ. कुतब मीनार दिल्ली में है. लाल बलुआ पत्थर और संगमरमर से बने है. दूर से, कुतब मीनार एक दूरबीन की तरह लगता है. उसकी ऊंचाई बहत्तर मीटर है और वह भारत का सब से लम्बी मीनार. लेकिन कुतब मीनार सब से लम्बी बुर्ज नहीं हैं, क्योंकि पंजाब का फ़तेह बुर्ज १०० मीटर है. ११९२ में राजा कुतब उद दिन ने बनवाया. कुतब उद दिन तुर्की वाला मुस्लिम था. इसलिए कुतब मीनार पर कुरान से छंद हैं. 

नज़दीक में आँगन है और इसमें कुतब उद दिन ने मस्जिद बनवाया. इस मस्जिद के नीचे बहुत सारे हिन्दू और जैन मंदिर थे. उसके खँडहर मीनार के लिए इस्तेमाल किया गया. इसलिए मीनार पर संस्कृत शब्द हैं जैसे "श्री विश्वकर्मा प्रसाद रचित." आँगन में लौह स्तंभ भी है. कथा यह है कि वह आदमी, जो अपने हथियार से स्तंभ घेर सकता है, को इच्छा सच आ जाएगा. इस कथे के मारे, सब लोग ने स्तंभ गले लगाए थे. पसीना लोहे के लिए बुरा था तो सरकार ने बड़ बनवाया.

कुतब मीनार का कारण रह्स्तय है. उसका नाम "मीनार" है लेकिन अगर एक आदमी वहां से ऊपर कड़ा है, तो लोग उसको नहीं सुन सकेगा. हमको भी नहीं पता कि कौनसा कुतब उद दिन ने बनवाया: कुतब उद दिन ऐबक, जिसका बेटा ने कुतब मीनार ठीक किया, या कुतब उद दिन, जो एक संत था.

mashur murti

अगर मई कोय मशुर मोनुमेंट को  देखने जा सकता है फिर मैं एक कास्तले स्कॉट्लैंड में जा चलना है. इस क्योंकि मई स्कॉट्लैंड की हिस्टरी मुझ को बहुत दिलचस्प है. मुझे हेरितागे स्कोत्तिश है. तो मुझ को सीक्न्हा स्कॉट्लैंड की हिस्टरी बहुत पसंद है. और अगर मैं एक स्कॉट्लैंड की कास्तले को जाता है, फिर मैं स्कॉट्लैंड के बारे में सीख सकता है. मुझ को सिर्फ चोट्टी स्कॉट्लैंड के बारे में मालूम है. स्कॉट्लैंड इंग्लैंड के उत्तर होता. इस लिए स्कॉट्लैंड के लोगों उन की देश इंग्लैंड की सेना से रक्षा पड़ता था स्कॉट्लैंड में यह रजा सब से लोगों अधिक महत्वपूर्ण है इस लिए वह रजा का घर बहुत बार है. वह रजा एक कास्तले में रहते है इसलिए वह विदेशियों से रक्षा सकता था. यहाँ दुसरे विदेशियों होता था स्कॉट्लैंड की उत्तर ये विकिंग्स रहता था ये विकिंग्स स्कॉट्लैंड को जाता था इसलिए स्कॉट्लैंड की लोगों बहुत डरता था कब ये विकिंगस स्कॉट्लैंड को आता था फिर ये स्कोत्तिश के लोगों कास्तले में जाता है तो यह कास्तले बहुत बार हो चाहिए तो ये कास्त्लेस बहुत बार है लेकिन अगर आप कास्त्लेस देखना है, फिर आप देखना है की यह कास्त्लेस छोटी टुटा हो. इस क्यों की ये कास्त्लेस भी बहुत पुराणी है. और या मौससम बहुत समय के बाद एरोड़े करेगा ये कास्त्लेस स्तोने से बनता था इस लिए ये कास्त्लेस अस्सं से एरोड़े करेगा मैं स्कॉट्लैंड को जा चलता भी है क्योंकि स्कॉट्लैंड मैं बहुत संगीत की कंसर्ट्स हो गाय मुझ को कंसर्ट्स बहुत पसंद है. 

Hava Mahal - Anuj Khetarpal


जब मैं पिछली बार भारत गया, मैं जयपुर भी गया था, लेकिन इतना वक़्त नहीं था, इसलिए, मैं हवा महल नहीं जा सका । हवा महल जयपुर, राजस्थान में है, और बहुत मशौर है क्योंकि इसमें नौ सौ से ज्यादा खिड़कियाँ है । ये 1799 में बनाया गया था, और इसका शपे एक क्रोवं जैसा है । लोग कहते हैं की जिस आदमी ने बनाया था, वह कृष्ण जी के बहुत बड़े देवोटी थे, और इसलिए उसने क्रोवं जैसा बनाया है । मैंने जयपुर में बहुत कुछ देखा है, लेकिन यह एक ही चीज़ है जो मैं देखना चाहता था और नहीं जा पाया । जयपुर के बिलकुल बीच में है, और जब मैं गाड़ी से शहर के अन्दर जा रहा था, यह बहुत ही खूबसूरत महल दिख गया । जब मैं अगली बार भारत जाऊँगा, मैं यह ज़रूर देखने जाऊँगा ।

हागिया सोफिया, इस्तांबूल

पिछली सेमेस्टर मैं एक अर्कितेक्चुर की इतिहास की क्लास ली और मैं ने इमारते के बारे में बहुत कुछ सीखी | हम ने सिर्फ इमारते की तस्वीरे देखी, इस लिए मैं एक दिन पूरी दुनिया घूमना चाहती हूँ | जिस इमारते मैं क्लास में सीखी, यह इमारते मैं अपनी आखो से देखूंगी | मुझको मालूम है कि मेरी पूरी दुनिया घुमने की इच्छा शायद मुमकिन नहीं है, लेकिन अगर मैं एक शहर जा सकती हूँ, तो वह शहर इस्तांबुल होगा | इस्तांबुल में हागिया सोफिया है, और मैं एक दिन ज़रूर वहा जाउंगी | हागी सोफिया अब एक संग्रहालय है, लेकिन पहले एक बसिलिका था और उस के बाद एक मसजिद था | हागिया सोफिया खास है क्यूँ कि अन्दर जाकर हर आदमी कुछ अलग महसूस करता है | बहुत सारे खिर्द्कियाँ है इस ईमारत में | लोग कहते है कि धुप हागिया सोफिया के अन्दर आती है और लगता है जैसे कि पूरा ईमारत चमक रहा है | जब हागिया सोफिया बन रहा था, तो लोगो दुसरे इमारते की सामग्री का इस्तमाल कर रहे थे | जब लोगो दुसरे इमारते की सामग्री इस्तमाल करते है, हम कह सकते है की जो ईमारत बन रहा है, वह ज्यादा खास है | हागिया सोफिया में बहुत जगह है जिस पर बहुत सुन्दर सजावट है और सजावट देखकर कुछ-न-कुछ हागिया सोफिया के बारे में आप सीख सकते है | क्यूँ कि यह ईमारत का इतिहास में दो धर्म का लोगों ने हागिया सोफिया का इस्तमाल की, आप दोनों धर्म का सजावट देख सकते है | मैं एक आर्किटेक्ट बनना चाहती हूँ, इस लिए मैं इमारते देखने और इमारते के बारे में पर्द्ने का शौक है | 


भारतीय स्मारक


मुझे भारथिये गेट देखना चाहिए. इस स्मारक न्यू दिल्ली में है. यह उन्नीस इक्कीस में बनाया था. और इसे जवानियों के लिए बनाया था. यह चालीस दो मीटर लंबा है. यह सभी भारत से बहुत मशहूर युद्ध स्मारक है. जगह बलिदान का प्रतीक है. यह नब्बे हजार सैनिकों कि मर गया के लिए था. दुनिया के दो युद्ध और अफगानिस्तान युद्ध में. कभी न कभी परिवारों वहां पिकनिक के लिए जाते हैं. यह Arc de Triomphe के लिए इसी तरह की है. गेट के पास एक किंग जॉर्ज मूर्ति था. लेकिन आज़ादी के बाद इस मूर्ति राज्याभिषेक बाग़ में ले गया था. भारथिये गेट में अमर जवान ज्योति भी है. इस ज्योति सभी अज्ञात जवानियों के लिए है. हर गणतंत्र दिवस एक जुलूस राष्ट्रपति भवन से लाल किला तक जाते हैं. जब जा रही वे गेट के माध्यम से जाते हैं. इस लिए हर गणतंत्र दिवस पर प्रधान मंत्री श्रद्धांजलि देने के लिया जाते हैं. लेकिन, राष्ट्रपति और मुख्य अतिथि इस नहीं करते हैं. आज-कल अन्य प्रसिद्ध लोगों भी श्रद्धांजलि देने के लिया जाते हैं. रात में गेट जलाया और बहुत खूबसूरत हुआ. इसलिए कोई लोगों सिर्फ रत पर जाते हैं. वहाँ कई सड़कों के माध्यम से चला गया हो. लेकिन आज वे जनता के लिए बंद कर रहे हैं. एक राष्ट्रीय प्रतीक की वजह से अगर आप भारत जाएँ, तो आप को भारथिये गेट देखने चाहिए. अगर आप सकें रत पर देखें.

पर्सपोलिस

मैं पर्सपोलिस देखना चाहती हूँ।  पर्सपोलिस एक बहुत पुराना शहर ईरान में है।  पर्सपोलिस के दुसरे नाम "तैख्ते  जमशीद", "चहल मीनार" और "पारसा" हैं।  पर्सपोलिस "अकमेनिद" के साम्राज्य [Achaemenid empire] की राजधानी थी।  "सीरूस" (या "साइरस थे ग्रेट" अंग्रेजी में) "अकमेनिद" के साम्राज्य का पहले पादशाह था।  "दारियुश" (या "दैरियास थे ग्रेट" अंग्रेजी में) और ज़र्क्सीज़  ने यह शहर बनवाया कोई पच्चीस सो साल पहले।  वहां कुछ बहुत बड़ी इमारतें हैं, जो चूना पत्थर [limestone] से बना गई। वे इमारतें ज़यादातर सेने के घर, पादशाह के घर, स्वागत कक्ष [reception halls], और खजाने के लिए थीं।  वे इमारतें पर बहुत नक्काशियां [carvings] हैं जिस में बहुत लोग सारे दुनिये से पर्सपोलिस आते हैं श्रद्धांजलि [tribute] देने के लिए।  ये नक्काशियां में कुछ हिन्दुस्तानी लोग भी भी आते हैं, श्रद्धांजलि देने के लिए, हाथियों पर। "अकमेनिद" का साम्राज्य बहुत बड़ा साम्राज्य था -- यूरोप (ग्रीस) और उत्तरी अफ्रीका (लीबिया) से, हिंदुस्तान (सिंधु नदी) तक।  इतने बड़े साम्राज्य में ज्यादी नौकरशाही [bureaucracy] का काम की ज़रुरत थी।  पर्सपोलिस दुनिये में एक पहली नौहर्शाही जैसे आधुनिक की नौकरशाही था।  वहां पुरातत्त्वविद् [archaeologists] ने बहुत ज्यादी प्रशासनिक गोलियाँ [administrative tablets] खोज की।  वे गोलियां आजकल यूनिवर्सिटी आफ शिकागो में हैं।  "अकमेनिद" के साम्राज्य की मज़हब "माज्दियनिस्म" थी।  यह मज़हब और पारसी धर्म मिलती जुलती हैं।  उनके भगवान् का नाम "अहुरामाज्दा" था।  लेकिन सब बड़े साम्राज्य एक दिन ख़त्म हो जाते हैं।  इस्कंदर (या "अलेक्सैन्दर थे ग्रेट" अंग्रेजी में) और उसके सेने ने ३३० बी-सी- में पर्सपोलिस को आक्रमण [attack] किया और लूट किया। 

कुछ इत्तिला इस निबंध के लिए इस साईट से है: http://en.wikipedia.org/wiki/Persepolis