एक दिन बहुत पहले जब में छोटा था मैं बहुत उदास था. मेरे पिता जी न मुझे वादा किया था कि वह मेरे लिये एक खिलौना वाली गाड़ी लेकर लाएगा. इस लिया मैं सुबह जल्दी उठ गया था. मैं जानता था कि मेरे पिता जी चिकागो से अन्न अर्बोर सुबह में पुहंचे गया. इस लिए में ने जल्दी उठकर सुब काम कतम करलिये. में ने सब से पहले तो ब्रुश किया और उसके बाद में ने शोवेर किया. माता जी अभी तक सो रहे था थो मैं ने उनको उठाया. पहले तो वह बहुत गुस्सा हुए लेकिन उसके बाद वह कुश होगे.उनको पता नहीं था कि पिता जी आज आ रहे हैं वो भी सुबह में. मैं ने अपने सब से अच्छे कपड़ा पहने और इन्तजार करना शुरू किया. तब सुबह के दस बजे हुए था. में बहार अपनी पोर्च पे बैठकर उनका इन्तजार कर रहा था. धीरे धीरे समय जाने लगा. पहले बारह बजे उसके बाद दो बजे. फिर मैं ने दोपहर का खनना खाया. तब तक मैं बहुत उदास हो चुक्का ता लेकिन मेरी माता जी ने कहा पिता जी आ जहाँ गया. में फिर से इन्तजार करने लगा लेकिन फिर वाहे हुआ. धीरे धीरे पांच बजगे और उसके बाद थो शाम भी होगी. पिता जी नहीं आहे और मैं बहुत उदास था. मैं ने सोचा कि यह कितना बुरा दिन था. मैं छोटा था इस लिए मुझे पता नहीं था कि हर चीज़ इस दुनिया में समय पर नहीं होती और मेरे पिता जी को कोई काम होगा. वह इस लिए नहीं आ सके. वह फिर भी मुझसे बहुत प्यार करते हैं और वह भी अवश्य उदास हुए होगे ना आने पर.
Saturday, 22 October 2011
जब मैं उदास थी - Rina Joshi
एक रात जब मैं सो रही थी, मेरे पिताजी अचानक उठ गया. उठ ने के बाद फोन बजने लगा. मेरे पिताजी फोन उठाकर कुछ नहीं बोला. फिर उसके चेहरा पर आँसू गिर गए. दस मिनट के बाद मेरे पिताजी ने उसके चेहरा साफ करके मेरी माँ के पास गया और उसको कहा की मेरी दादी माँ मर चुका हैं. जब मेरे पिताजी फोन पर बात कर रहा था मैं उती और सब कुछ सुना. वह सुबह मेरे पिताजी और मेरी माँ मुझको कहा की मेरी दादी माँ इस दुनिया में नहीं रही. फिर हर दिन मैं बहुत उदास थी. सब कुछ टीक नहीं था. मुझको खाना या नाचना या पदी कर नहीं सकती. मैं मेरा बिस्तर पर बेठी और रो गयी. मेरी दादी माँ एक आच्छी इन्सान थी. वह बहुत सुन्दर थी, अन्दर और बहार. मैं और मेरी दादी माँ बहुत करीब नहीं थे. वह भारत मैं रहेती थी लेकिन सब लोग कहते हैं की मैं और मेरी दादी एक जैसे दिखते हैं. जब मेरे पिताजी रो रहे थे, मुह्ज्को बहुत दुखी हुई थी क्यूंकि मेरे पिताजी कभी नहीं रोते हैं. इसलि मैं भी रो गयी. उस दिन मेरी यादें मैं रहता है. यह एक ठंड जनवरी दिन था. उस रत मुझको एक पार्टी में जाना था. मैं ने मेरी माँ से पुछा की मैं जा का नहीं. और उसने कहा की मैं पार्टी में जाना होगी क्यूंकि मैं ने हा कहा. पार्टी में मैं बहुत उदास थी. लेकिन मैं मुस्कुराकर गयी. पार्टी के बाद मैं वापस घर गयी और सो गयी, क्यूंकि सोने के बाद दुक कम हो जाता है.
Friday, 21 October 2011
Thursday, 20 October 2011
Wednesday, 19 October 2011
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